धनबाद में 400 बेड वाले नए सदर अस्पताल भवन के निर्माण की दिशा में जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। सदर अस्पताल के विस्तारीकरण के लिए प्रस्तावित सरकारी भूमि का अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया के तहत धनबाद अंचल के अंचलाधिकारी (सीओ) रामप्रवेश राम ने रणधीर वर्मा चौक के समीप स्थित स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल की जमीन पर रह रहे परिवारों को भूमि खाली करने का निर्देश दिया गया। वहीं, प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास की मांग करते हुए कहा कि वैकल्पिक घर या जमीन मिलने के बाद ही वे स्थान खाली करेंगे।
400 बेड अस्पताल निर्माण के लिए प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान सीओ रामप्रवेश राम ने सदर अस्पताल प्रबंधन के अधिकारियों के साथ प्रस्तावित निर्माण स्थल का जायजा लिया। प्रशासन के अनुसार, राज्य सरकार ने सदर अस्पताल के विस्तारीकरण के तहत 400 बेड का आधुनिक अस्पताल भवन बनाने की योजना तैयार की है।
अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से संबंधित क्षेत्र का सर्वेक्षण और चिन्हांकन किया जा रहा है।
कई दशक से रह रहे परिवारों को मिला जमीन खाली करने का निर्देश
रणधीर वर्मा चौक के समीप अस्पताल परिसर की भूमि पर रहने वाले आधा दर्जन परिवारों का कहना है कि वे पिछले 60 से 70 वर्षों से वहां रह रहे हैं। प्रशासन ने उन्हें भूमि खाली करने का निर्देश दिया है।
सीओ रामप्रवेश राम ने कहा कि प्रारंभिक जांच में संबंधित परिवारों द्वारा भूमि स्वामित्व से जुड़े कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी योजना के क्रियान्वयन के लिए अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
हालांकि, मुआवजा या पुनर्वास से जुड़े निर्णय उच्च स्तर पर लिए जाएंगे।
प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास की उठाई मांग
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की कि यदि उन्हें हटाया जाता है तो पहले उनके लिए वैकल्पिक आवास या जमीन की व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि वे कई दशकों से इसी स्थान पर रह रहे हैं और अचानक घर खाली करने के निर्देश से उनके सामने आवास का संकट खड़ा हो गया है।
परिवारों ने कहा कि बिना पुनर्वास के वे जमीन खाली नहीं करेंगे।
एक व्यक्ति ने पांच कट्ठा रैयती जमीन होने का किया दावा
निरीक्षण के दौरान डॉ. कुमार आलोक ने संबंधित भूमि के एक हिस्से पर अपना रैयती अधिकार होने का दावा किया। उन्होंने बताया कि लगभग पांच कट्ठा भूमि के संबंध में वर्ष 2006 में उन्हें न्यायालय से निर्णय प्राप्त हुआ था।
सीओ ने उन्हें अपने दावे से संबंधित सभी दस्तावेज कार्यालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, ताकि रिकॉर्ड के आधार पर मामले की जांच की जा सके।

