देहरादून: प्रदेश की जेलों में अब कैदियों की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया जाएगा। AI की मदद से कैदियों की हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी संदिग्ध घटना का समय रहते पता लगाया जा सके। अगर कैदियों के बीच लड़ाई होती है, कोई जेल से भागने की कोशिश करता है या आत्महत्या का प्रयास करता है, तो AI सिस्टम तुरंत इसकी पहचान कर लेगा और अधिकारियों को अलर्ट भेज देगा।
इस तकनीक का ट्रायल देहरादून जेल में शुरू हो चुका है। इसके लिए जेल में 200 से ज्यादा कैमरे और सेंसर लगाए गए हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत जेलर, उप जेलर और कंट्रोल रूम तक पहुंच जाती है।
ट्रायल सफल होने के बाद इस AI सिस्टम को हरिद्वार और सितारगंज जेल में भी लागू किया जाएगा।प्रदेश की जेलों में लगातार आपराधिक गतिविधयों की बात सामने आती रहती है। कभी कैदियों के बीच आपसी लड़ाई की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
पूर्व में जेलों से कैदियों के भागने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। वहीं कैदियों के आत्महत्या के प्रयास की बात सामने आ चुकी हैं। अब इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए एआइ का सहयोग लिया गया है। इसके तहत कभी भी कैदियों के बीच भीड़ बढऩे पर एआइ के जरिये तुरंत एक मैसेज कंट्रोल रूम चला जाएगा। इससे जेलर व अन्य अधिकारी इन गतिविधियों को तुरंत देख सकेंगे। इसी प्रकार यदि कोई व्यक्ति सुनसान जगह जाता है या कोने में जाता है तो कैमरे उसके पास धारदार हथियार अथवा अन्य संदिग्ध वस्तुओं की पहचान करेंगे। इनके दिखते ही तुरंत कंट्रोल रूम और सुरक्षा अधिकारियों को संदेश चला जाएगा।
कैमरे, फाइबर आप्टिकल व सेंसर तुरंत करेंगा पहचान
ऐसे ही यदि कोई दीवार तोड़ने अथवा दीवार फांद कर भागने का प्रयास करेगा तो कैमरे, फाइबर आप्टिकल व सेंसर तुरंत इसकी पहचान कर इसकी सूचना सुरक्षा अधिकारियों व कंट्रोल रूम को भेज देंगे। सचिव गृह शैलेश बगौली का कहना है कि जेलों को सुरक्षित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए नई तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

