भारत की ट्रेनों पर लगातार हमले! केंद्र ने जारी किए 6 साल के चौंकाने वाले आंकड़े

भारत की ट्रेनों पर लगातार हमले! केंद्र ने जारी किए 6 साल के चौंकाने वाले आंकड़े

देश में ट्रेनों को निशाना बनाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैंकई जगह चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी की गई, जिससे खिड़कियों के शीशे टूट गए और यात्री घायल हो गए। वहीं कुछ मामलों में लोको पायलट ने समय रहते रेलवे ट्रैक पर रखा लोहे का पाइप देख लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

इसके अलावा कुछ स्थानों पर धमाकों की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिनसे माल ढुलाई वाले रेल कॉरिडोर को नुकसान पहुंचा है। इन लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कई जांच एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है और घटनाओं के पीछे की वजह का पता लगाया जा रहा है।

हमलों के पीछे आखिर क्या छुपी है?

अलग-अलग राज्य और हमले के अलग-अलग तरीके, लेकिन पुलिस का कहना है कि ये एक चिंताजनक ट्रेंड को दिखाता है। भारत के रेलवे नेटवर्क के सामने आने वाले खतरों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है।

रेलवे पुलिसिंग का काम दशकों तक मुख्य रूप से चोरी, बिना इजाजत घुसने और कभी-कभार तोड़-फोड़ की घटनाओं तक ही सीमित था। लेकिन अब रेलवे सुरक्षा बल (RPF), सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) और राज्य की एजेंसियां कई तरह के खतरों से निपट रही हैं।

इन खतरों में असामाजिक तत्वों क पत्थर फेंकने से लेकर सोच-समझकर ट्रेन को पटरी से उतारने की कोशिशें और हाल ही में माल ढुलाई के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर विस्फोटक हमले तक शामिल हैं।

पत्थरबाजी की 7,971 घटनाएं हुईं, जिनमें 4,549 लोग गिरफ्तार

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा को बताया कि 2023 से फरवरी 2025 के बीच देश भर में पत्थरबाजी की 7,971 घटनाएं हुईं, जिनमें 4,549 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान जोनल रेलवे ने क्षतिग्रस्त कोचों की मरम्मत पर 5.79 करोड़ रुपये खर्च किए।

ऐसी घटनाओं से कोई भी रूट इससे अछूता नहीं रहा है। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में, एक 20 साल के युवक को गिरफ्तार किया गया और उसने माना कि उसने भोपाल-दिल्ली वंदे भारत पर सिर्फ मजे के लिए पत्थर फेंके थे।

केरलम में, एर्नाकुलम और बेंगलुरु के बीच चलने वाली वंदे भारत की खिड़की को पराली के पास नुकसान पहुंचाया गया, जबकि एक अलग घटना में अंगमाली में ट्रेन के दो कोचों पर पत्थर मारे गए।

वैष्णव ने संसद में पहले दिए गए एक जवाब में बताया कि 2019 से 2023 के बीच, सिर्फ वंदे भारत ट्रेनों पर पत्थरबाजी से 55.60 लाख रुपये का नुकसान हुआ है और इन मामलों में 151 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि बीते छह साल में ट्रेनों पर हमले के 10,000 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं।

यह हिंसा हमेशा बिना सोचे-समझे की गई शरारत नहीं होती। औरंगाबाद में, शरारती तत्वों ने सिकंदराबाद-मुंबई देवगिरी एक्सप्रेस पर पत्थर फेंके, ट्रेन को जानबूझकर सिग्नल का तार काटकर रोका गया था। इस अफरातफरी के दौरान, एक महिला यात्री की सोने की चेन छीन ली गई, जब वह अपनी खिड़की बंद करने की कोशिश कर रही थी।

ट्रेनों पर हो रहे हमलो की क्या है वजह

रेलवे अधिकारी इन हमलों की एक वजह के बजाय कई कारणों को जिम्मेदार बताया। पटरियों के पास बिना देख-रेख के खेल रहे बच्चे ऐसी घटनाओं में बड़ी भूमिका निभाते हैं। दिल्ली में RPF अधिकारियों ने देखा कि ऐसे कई बच्चे स्कूल नहीं जाते और शरारत में पत्थर फेंकते हैं, जिससे ट्रेनें अनजाने में उनका निशाना बन जाती हैं। दिल्ली RPF के आंकड़ों के मुताबिक, एक साल में 32 घटनाओं में 37 बच्चे शामिल थे और अगले साल छह घटनाओं में 11 बच्चे शामिल थे, उनकी उम्र को देखते हुए उनमें से किसी के भी खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया।

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