जनगणना के आंकड़ों पर सरकार की सख्ती, अगले आदेश तक डेटा साझा करने पर रोक

जनगणना के आंकड़ों पर सरकार की सख्ती, अगले आदेश तक डेटा साझा करने पर रोक

देश में होने वाली जनगणना को लेकर रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (आरजीआई) ने अहम निर्देश जारी किए हैं। आरजीआई के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने सभी जनगणना अधिकारियों से कहा है कि अगले आदेश तक जनगणना के दौरान जुटाए गए किसी भी अनंतिम या अन्य आंकड़े को प्रेस या किसी अन्य संस्था के साथ साझा न किया जाए। देशभर के जनगणना अभियान निदेशालयों (डीसीओ) को भेजे गए परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि जनगणना के दौरान एकत्र की गई सभी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय हैं। इन आंकड़ों का खुलासा जनगणना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के तहत प्रतिबंधित है।

जनगणना डेटा नहीं होगा जारी

नारायण ने कहा कि जनगणना के दौरान एकत्रित एवं प्रोसेस किए गए डाटा की गोपनीयता के बारे में प्रधान जनगणना अधिकारी से लेकर गणना करने वालों और डीसीओ स्टाफ तक, सभी जनगणना कर्मचारियों को उचित तरीके से जागरूक किया जाना चाहिए।

परिपत्र में कहा गया है, ‘जनगणना के काम से जुड़े किसी भी अधिकारी द्वारा निर्देशों का कोई भी उल्लंघन गंभीरता से लिया जाएगा और गलती करने वाले अधिकारियों पर जनगणना अधिनियम, 1948 और अन्य संबंधित कानूनों व नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।’

नारायण ने कहा कि हालांकि जनगणना पूरी तरह से डिजिटल है, लेकिन आपरेशनल आपात स्थितियों में निर्देश पुस्तिका में दिए गए पेपर शेड्यूल का इस्तेमाल करके डाटा एकत्रित किया जा सकता है।

प्रभारी अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि पेपर मोड में एकत्रित सभी हाउसलिस्टिंग ब्लॉक के डाटा की एंट्री जनगणना पोर्टल पर सात दिनों के अंदर पूरी हो जाए। वहीं इसके रिकॉर्ड ठीक से पैक किए गए बाक्स में डाक विभाग के जरिये डीसीओ को भेजे जाएंगे। जनगणना के दौरान एकत्रित डाटा की पैकिंग और रिकार्ड रखने में तय नियमों का पालन किया जाएगा।

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