करीब तीन सप्ताह तक धीमी रफ्तार से आगे बढ़ने के बाद अब मानसून ने फिर से गति पकड़ ली है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में तेजी से सक्रिय होने के बाद अब इसका अगला पड़ाव दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पंजाब माना जा रहा है। भारत मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अगले 24 से 48 घंटों के भीतर मानसून दिल्ली पहुंच सकता है। इसके साथ ही उत्तर भारत के लोगों को लंबे समय से पड़ रही उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।
आईएमडी का कहना है कि अल नीनो की आशंकाओं के बावजूद फिलहाल मानसून के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। हालांकि, जून का महीना बारिश के लिहाज से काफी कमजोर रहा।
इस दौरान सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई, जो पिछले 12 वर्षों में जून की सबसे कम बारिश है। आंकड़ों के मुताबिक, जून के अंत तक देश में केवल 99.5 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इससे पहले वर्ष 2014 में जून के दौरान 92.8 मिलीमीटर वर्षा हुई थी। पिछले 100 वर्षों के रिकॉर्ड के अनुसार, इस बार का जून तीसरा सबसे सूखा जून रहा है।
मानसून ने पिछले दो दिनों में तेजी दिखाई है। यह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों को कवर करते हुए हिमाचल और लद्दाख के कुछ क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। अगले कुछ दिनों में यह हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और गुजरात के शेष हिस्सों में भी आगे बढ़ जाएगा।
यही गति बनी रही तो चार-पांच दिनों के भीतर ही मानसून पूरे देश को कवर कर सकता है। जुलाई की शुरुआत में बनने वाली अनुकूल परिस्थितियां और बंगाल की खाड़ी से लगातार मिल रही नमी जून की कमी को काफी हद तक भरपाई कर सकती हैं।
10 दिनों में झमाझम बारिश की उम्मीद
स्काइमेट के अनुसार मानसून को अनुकूल मौसमी तंत्रों का सहारा मिल रहा है। बंगाल की खाड़ी, उत्तर प्रदेश, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और पाकिस्तान के सिंध इलाके में चार साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं। पंजाब से लेकर बंगाल तक एक ट्रफ लाइन बनी हुई है। इन सभी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से मानसून को अतिरिक्त ऊर्जा मिल रही है और वर्षा गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।
दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गुरुवार से ही बारिश की स्थितियां अनुकूल हो जाएंगी। उसके बाद जुलाई के पहले दस दिनों तक कई क्षेत्रों में झमाझम बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों में अभी से ही तापमान गिरने लगा है और मौसम पहले की तुलना में अधिक राहत भरा महसूस होने लगा है।
जुलाई के पहले सप्ताह में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने तीन जुलाई के आसपास उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना जताई है। यह प्रणाली पश्चिम की ओर बढ़ते हुए मानसून को मजबूत कर सकती है।
उत्तर प्रदेश में अगले 24 घंटों के दौरान कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की गई है। एनसीआर में भी बादल छाए रहने और बारिश की संभावना है। गुजरात संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है, जहां अत्यधिक वर्षा का खतरा बना हुआ है।

