नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा संपन्न होने के बावजूद पेपर लीक विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। इस री-एग्जाम में देशभर के 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक सख्त रही, जहां उम्मीदवारों की विस्तृत जांच और कड़े नियमों का पालन कराया गया।
इसी बीच पश्चिम बंगाल की एक महिला अभ्यर्थी ने परीक्षा केंद्र पर हुई जांच प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रा का दावा है कि सुरक्षा जांच के दौरान उसके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और तलाशी की प्रक्रिया ने उसे मानसिक रूप से काफी आहत किया। अभ्यर्थी ने अपने अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
अभ्यर्थी ने इंस्टाग्राम पर आपबीती को बयां किया है। Re-NEET परीक्षा देने वाली ऋषिका पाल ने इंस्टाग्राम पर अपनी आईडी ‘hrishikaapal’ से एक पोस्ट में लिखा है कि महिला स्टाफ सदस्य ने उनसे पूछा कि क्या उन्हें पीरियड्स हो रहे हैं। जब उन्होंने ‘हां’ में जवाब दिया, तो उन्हें अपनी पैंट नीचे करने के लिए कहा गया ताकि उनके सैनिटरी पैड की जांच की जा सके।
मुझे सदमा लगा और शर्मिंदगी महसूस हुई-ऋषिका पाल
ऋषिका पाल ने ब्योरे के अनुसार उसे मालदा विभूतिभूषण हाई स्कूल में Re-NEET परीक्षा दी थी। ऋषिका पाल ने लिखा है कि इससे मुझे सदमा लगा और शर्मिंदगी महसूस हुई। मुझे बेबस महसूस हुआ। ऋषिका पाल ने लिखा है कि मुझे डर था कि अगर मैंने निर्देश मानने से इनकार किया, तो परीक्षा हॉल में उनके प्रवेश पर खतरा आ सकता है।
सभी केन्द्रों पर पीरियड्स की जांच की गई?
नीट के अभ्यर्थी के तौर पोस्ट करने वाली ऋषिका पाल ने सवाल किया कि क्या ऐसी प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर अधिकृत थी और क्या अन्य उम्मीदवारों की भी ऐसी ही जांच की गई थी। उन्होंने लिखा है कि सुरक्षा जांच जरूरी है, लेकिन अपमान नहीं। उन्होंने मांग की कि परीक्षा अधिकारी निष्पक्षता सुनिश्चित करने और व्यक्तिगत गरिमा का सम्मान करने के बीच की सीमा को लेकर अधिक स्पष्टता लाएं। ऋषिका पाल ने कहा कि उन्होंने कई महिला उम्मीदवारों से बात की है जिन्होंने अलग-अलग केंद्रों पर Re-NEET परीक्षा दी थी। उनके अनुसार किसी ने भी यह नहीं बताया कि उनसे उनके पीरियड्स की स्थिति के बारे में पूछा गया हो या ऐसी कोई जांच की गई हो। उन्होंने कहा कि मैंने कई महिला उम्मीदवारों से बात की जो अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर री-नीट (Re-NEET) में शामिल हुई थीं। उनमें से किसी से भी यह नहीं पूछा गया कि क्या उन्हें पीरियड्स हो रहे हैं, और न ही उनकी इस तरह से जांच की गई। ऋषिका पाल की पोस्ट के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने अपने अनुभव और प्रतिक्रियाएं साझा कीं हैं जिनमें से कुछ ने आरोप लगाया कि मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के दौरान उन्हें भी ऐसी ही जांच का सामना करना पड़ा था।
