पटना: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने घोषणा की है कि पूरे मामले की जांच Patna High Court के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराई जाएगी। सरकार का कहना है कि जांच का उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष और पारदर्शी पड़ताल करना है ताकि सच्चाई सामने आ सके। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं। पहली एफआईआर में अवैध हथियार रखने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस पर गोली चलाने और आरोपी को संरक्षण देने जैसे आरोप शामिल हैं। इस मामले में भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को नामजद किया गया है।
दूसरी एफआईआर सीधे पुलिस मुठभेड़ से संबंधित है। वहीं भरत तिवारी की मां आशा देवी ने संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए आवेदन दिया है। उनका आरोप है कि उनके बेटे को आत्मसमर्पण के बाद गोली मारी गई। हालांकि पुलिस की ओर से अब तक इस आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
इस मामले को लेकर कानूनी हलकों में भी सवाल उठाए जा रहे हैं। पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता रजनीश कुमार ने मुठभेड़ को संदिग्ध बताते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने दोषी पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और मामले में स्वतः संज्ञान लेने की अपील भी की है।पुलिस के अनुसार 16 जून को मिली सूचना के आधार पर 17 जून की सुबह भरत तिवारी की गिरफ्तारी और अवैध हथियार बरामद करने के लिए टीम उसके गांव पहुंची थी। पुलिस का दावा है कि टीम को देखते ही भरत तिवारी ने हथियार निकाल लिया और फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद वह घर की छत पर चढ़ गया और पुलिस पर कई राउंड गोली चलाई।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान भरत के पिता और भाई ने उसके पास हथियार होने की जानकारी दी थी। इसी आधार पर दोनों को मामले में आरोपी बनाया गया है। उन पर आरोपी को संरक्षण देने और अवैध हथियार रखने में सहयोग करने का आरोप है।
दूसरी प्राथमिकी में पुलिस ने दावा किया है कि भरत तिवारी हथियार लेकर भागने की कोशिश कर रहा था। पीछा करने पर उसने दोबारा फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार कई बार आत्मसमर्पण की चेतावनी दिए जाने के बावजूद उसने गोली चलाना जारी रखा।पुलिस का कहना है कि आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई, जिसमें भरत तिवारी घायल हो गया। उसे इलाज के लिए शाहपुर रेफरल अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस के मुताबिक घटनास्थल से एक देसी पिस्टल, मैगजीन, दो जिंदा कारतूस और दो खोखे बरामद किए गए हैं। एफआईआर में उल्लेख है कि भरत तिवारी ने 10 से 12 राउंड फायरिंग की थी, जबकि पुलिस की ओर से आत्मरक्षा में पांच राउंड गोली चलाई गई थी। न्यायिक जांच के आदेश के बाद अब पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल पर सबकी नजरें टिकी हैं।

