फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन और स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुनिया के सामने इसी भारत की झलक प्रस्तुत की। उनके द्वारा भेंट किए गए उपहार महज औपचारिक कूटनीतिक सौगात नहीं थे, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा, आयुर्वेदिक विरासत, कारीगरों के कौशल और स्थानीय उत्पादों की वैश्विक पहचान का सशक्त परिचय थे।
गूंजी आयुर्वेद और भारतीय परंपरा की पहचान फ्रांस के एवियन में आयोजित 52वें जी7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व नेताओं को राजस्थान के नागौर की जीआई टैग प्राप्त नागौरी अश्वगंधा, जम्मू-कश्मीर के चिनाब घाटी क्षेत्र की प्रसिद्ध रामबन शहद और वाराणसी की प्रतिष्ठित बनारसी सिल्क स्टोल भेंट की। आयुर्वेद में रसायन मानी जाने वाली अश्वगंधा ऊर्जा, प्रतिरोधक क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। वहीं रामबन शहद हिमालयी जैव विविधता और पारंपरिक मधुमक्खी पालन की अनूठी विरासत को दर्शाती है। बनारसी सिल्क स्टोल भारत की सदियों पुरानी बुनकरी परंपरा, उत्कृष्ट कारीगरी और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है। महाभारत का संदेश पहुंचा फ्रांस के राष्ट्रपति तकप्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को आंध्र प्रदेश की हस्तनिर्मित कलमकारी महाभारत पेंटिंग भेंट की, जिसे तैयार करने में लगभग छह महीने लगे।
इस कलाकृति में महाभारत और भगवद्गीता के माध्यम से कर्तव्य, न्याय, साहस, आत्मानुशासन और नैतिक नेतृत्व के संदेश को उकेरा गया है। फ्रांस की प्रथम महिला ब्रिगिट मैक्रों को तेलंगाना की प्रसिद्ध पोचमपल्ली सिल्क स्टोल भेंट की गई, जो पारंपरिक इकट बुनाई और भारतीय वस्त्र कला की उत्कृष्ट पहचान है।
स्लोवाकिया में भारतीय परंपरा का प्रदर्शन
स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी को प्रतापगढ़ की दुर्लभ थेवा कला से निर्मित कफलिंक्स, औरंगाबाद की हिमरू सिल्क टाई व पाकेट स्क्वायर तथा डोकरा कला से निर्मित ब्रास एंटीलोप सेट भेंट किया गया। थेवा और हिमरू दोनों ही जीआई मान्यता प्राप्त भारतीय शिल्प परंपराओं का हिस्सा हैं।
वहीं स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री राबर्ट फिको को कश्मीर की विश्वप्रसिद्ध रेशमी कालीन उपहार में दी गई, जिसे तैयार करने में कई बार महीनों से लेकर वर्षों तक का समय लगता है। ठेकुआ के स्वाद के साथ पहुंचा भारत का प्राचीन चिकित्सा ज्ञानस्लोवाकिया नेशनल काउंसिल के अध्यक्ष रिचर्ड रासी को बिहार-झारखंड की पारंपरिक मिठाई ठेकुआ के साथ आयुर्वेद के सुश्रुत संहिता व चरक संहिता ग्रंथ भेंट किए गए।

