हिमाचल प्रदेश के शिमला में गुरुवार को ढली-संजौली बाईपास पर अचानक पहाड़ दरकने से भीषण भूस्खलन हो गया, जिसका वीडियो सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक पहाड़ी का बड़ा हिस्सा ताश के पत्तों की तरह ढह रहा है। इस भीषण भूस्खलन के कारण भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें मुख्य सड़क पर आ गिरीं, जिससे मार्ग के दोनों ओर वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। गनीमत रही कि हादसे के वक्त कोई वाहन इसकी चपेट में नहीं आया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
इस भीषण भूस्खलन के कारण भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें मुख्य सड़क पर आ गिरीं, जिससे मार्ग के दोनों ओर वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। गनीमत रही कि हादसे के वक्त कोई वाहन इसकी चपेट में नहीं आया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और संबंधित विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। सड़क से मलबे और पत्थरों को हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। हालांकि, पहाड़ी से लगातार रुक-रुक कर गिर रहे मलबे के कारण राहत कार्य में बाधा आ रही है। मार्ग बंद होने से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे दैनिक यात्रियों और पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शिमला पुलिस ने स्थिति देखते हुए स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि वे फिलहाल ढली-संजौली बाईपास की ओर जाने से बचें और अपने गंतव्य के लिए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। इसके साथ ही, प्रभावित क्षेत्र में तैनात यातायात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है। प्रशासन का कहना है कि मार्ग पूरी तरह सुरक्षित होने के बाद ही इसे दोबारा खोला जाएगा और इसकी जानकारी तुरंत सार्वजनिक की जाएगी।
दिल्ली बाईपास के समीप मलबा गिरने की घटनाएं
दूसरी ओर, बारिश का मौसम शुरू होते ही पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ने लगा है। दिल्ली बाईपास के समीप भी पहाड़ से लगातार पत्थर और मलबा गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। सड़क किनारे स्थित पहाड़ी हिस्से में दरारें दिखाई देने लगी हैं, जिससे किसी बड़े भूस्खलन की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले भी कई बार पहाड़ दरकने की घटनाएं हो चुकी हैं। पहाड़ी के नीचे और आस-पास स्थित बहुमंजिला भवनों पर भी खतरा मंडरा चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, बरसात के दौरान जमीन में नमी बढ़ने से पहाड़ की स्थिरता प्रभावित होती है, जिससे चट्टानों और मिट्टी के खिसकने का जोखिम बढ़ जाता है।

