रांची। झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए मतदान संपन्न होने के साथ ही राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। वोटिंग खत्म होते ही इंडिया गठबंधन और एनडीए दोनों ने अपनी-अपनी जीत के दावे करने शुरू कर दिए हैं। मतगणना से पहले ही सियासी बयानबाजी तेज हो गई है और दोनों खेमे अपने-अपने संख्या बल को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं।
आरजेडी और माले के छह विधायक बने चर्चा का केंद्र
पूरे चुनावी समीकरण में आरजेडी और माले के कुल छह विधायकों की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में है। राजनीतिक गलियारों में इन्हें संभावित “गेमचेंजर” माना जा रहा है। 81 सदस्यीय विधानसभा में मामूली बदलाव भी परिणामों को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इन विधायकों की भूमिका पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायकों का समर्थन
इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन है। इनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, आरजेडी के 4 और माले के 2 विधायक शामिल हैं। इस संख्या बल के आधार पर गठबंधन दोनों सीटों पर जीत का दावा कर रहा है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अंतिम तस्वीर मतगणना के बाद ही साफ होगी।
कांग्रेस ने किया 28.97 वोट मिलने का दावा
कांग्रेस विधायक और वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने दावा किया है कि पार्टी प्रत्याशी प्रणव झा को 28.97 वोट प्राप्त होंगे। माना जा रहा है कि यह दावा दूसरी प्राथमिकता के वोटों के गणित को ध्यान में रखकर किया गया है। कांग्रेस नेतृत्व अपनी रणनीति को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिखाई दे रहा है।
एनडीए को 24 विधायकों के समर्थन पर भरोसा
दूसरी ओर एनडीए के पास कुल 24 विधायक हैं। इनमें भाजपा के 21 विधायक तथा आजसू, जदयू और लोजपा के एक-एक विधायक शामिल हैं। एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी को लेकर भी गठबंधन जीत का भरोसा जता रहा है।
‘अंतरात्मा की आवाज’ पर टिकी चर्चाएं
राज्यसभा चुनाव के दौरान “अंतरात्मा की आवाज” शब्द सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। राजनीतिक हलकों में क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि किसी भी दल की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
एजेंटों और निगरानी पर विशेष फोकस
चुनाव के दौरान पार्टी एजेंटों की भूमिका अहम मानी गई। विभिन्न दलों ने अपने विधायकों पर नजर बनाए रखी और मतदान प्रक्रिया की लगातार मॉनिटरिंग की गई। कांग्रेस, झामुमो और आरजेडी समेत सभी दलों ने अपने-अपने स्तर पर रणनीति तैयार की थी।
मतगणना पर टिकी सबकी निगाहें
मतदान के बाद नेताओं की बॉडी लैंग्वेज और बयानों को भी राजनीतिक संकेतों के रूप में देखा जा रहा है। कहीं आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है तो कहीं हल्की बेचैनी। अब सभी की निगाहें मतगणना के नतीजों पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि किसका गणित सही साबित होता है और किसके दावे हवा साबित होते हैं।

