पूर्व मेदिनीपुर (पश्चिम बंगाल): जिले के विकास को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। दीघा में हुई प्रशासनिक बैठक के बाद पूर्व मेदिनीपुर जिला परिषद भवन में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के विकास की रूपरेखा और विभिन्न समस्याओं के समाधान पर चर्चा हुई।
बैठक में सांसद, विधायक, जिलाशासक, अतिरिक्त जिलाशासक समेत कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
विकास योजनाओं और आधारभूत सुविधाओं पर चर्चा
बैठक में जिले की आधारभूत संरचना, कृषि, पर्यटन, उद्योग और जलनिकासी से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने जिले के अलग-अलग क्षेत्रों की समस्याओं को चिन्हित कर उनके समाधान के लिए योजनाओं पर विचार किया।
लंबे समय बाद हुई दिशा बैठक
कांथी के सांसद सौमेंदु अधिकारी ने कहा कि करीब छह-सात साल बाद दिशा कमेटी की बैठक आयोजित हुई है। उन्होंने कहा कि नई सरकार बनने के बाद जिले की समस्याओं और विकास योजनाओं पर चर्चा का अवसर मिला है।
उन्होंने बताया कि पूर्व मेदिनीपुर में पर्यटन, उद्योग, मत्स्य पालन, धान, पान और फूल की खेती जैसे क्षेत्रों में काफी संभावनाएं हैं। इन संसाधनों के बेहतर उपयोग से जिले के आर्थिक और सामाजिक विकास को गति देने पर चर्चा हुई।
सभी को साथ लेकर विकास का दावा
राज्य के प्रतिमंत्री अरूप दास ने कहा कि विकास से जुड़े मुद्दों पर सभी जनप्रतिनिधियों को साथ लेकर चलने की नीति अपनाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि विकास किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि आम लोगों का विषय है। प्रशासनिक बैठकों में विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं पर चर्चा कर समाधान की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
जलनिकासी और घाटाल मास्टर प्लान पर भी चर्चा
बैठक में जलनिकासी की समस्या को लेकर भी चर्चा हुई। मंत्री अरूप दास ने कहा कि सभी समस्याओं का समाधान तुरंत होने का दावा नहीं किया जा सकता, लेकिन लंबे समय से चली आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है।
उन्होंने घाटाल मास्टर प्लान और डीवीसी के साथ समन्वय बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने की बात कही।
लंबे समय बाद हुई इस बैठक के बाद जिले की विकास परियोजनाओं और आधारभूत समस्याओं के समाधान को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सकारात्मक माहौल देखने को मिला।
रिपोर्ट: अतीकुर रहमान, पश्चिम बंगाल | न्यूज़ ANP

