बिहारी युवक शेखर सुमन सुमन की वापसी एक राहत है, एक उम्मीद की किरण है हमारे जैसे लोगों के लिए जो एक लंबे समय से कॉमेडी और मनोरंजन के नाम पर युवाओं और कुछ प्रौढ़ों द्वारा मचाई गई गंदगी और फूहड़ता से ऊब चुके हैं ..अब लोग कपिल शर्मा शो की भद्दे कॉमेडी से ऊब चुके है.. राजनीति और देश की जरूरी मुद्दे पर हास्य परिहास कहीं दिखाई नहीं देती.
90 की दशक में जब हम विद्यार्थी थे तब शेखर सुमन जी का शो “मूवर्स एंड शेकर्स” आया करता था जो सुपरहिट था..उनके शो में कभी फूहड़ता या छिछलापन नहीं होता था, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर धारधार व्यंग्य होता था. बिहार के मध्यमवर्गीय परिवार से निकले, दिल्ली में पढ़े –लिखे शेखर सुमन की अंग्रेजी करण जौहर से भी ज्यादा अच्छी है,हिंदी और अंग्रेजी दोनों पर गहरी पकड़ उनकी मेहनत और कार्य के प्रति समर्पण को दिखाता है. अपने बड़े पुत्र को,पहले पुत्र को महज 11 वर्ष की उम्र में खो देने वाले शेखर सुमन ने कभी अपनी निजी पीड़ाओं और अवसाद से गुजरने के दौर का सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं किया, जैसा आजकल के कई सेलिब्रिटी करते हैं, वो भी ब्रेकअप से मिले डिप्रेशन का!
हाल ही में उनके शो “शेखर टुनाइट” में मनोज वाजपेयी आए थे, मेहनत और संघर्ष से खड़े हुए दो कलाकारों को सुन बहुत अच्छा लगा. प्रेरणादाई एपिसोड था यह. ये दोनों अभिनेता इस मायने में भी खास हैं कि दोनों बिहार से,मिडिल क्लास परिवार से हैं, मेहनत से,धक्के खाकर खड़े हुए हैं. शादी की और निभाया और हां कभी भी नेपोटिज्म जैसे परिवारवाद जैसे मुद्दे उठाकर खुद को विक्टिम नहीं साबित किया. बल्कि उसे एक चुनौती के रूप में लिया और अपना काम करते रहे…निजी जीवन भी बैलेंस किया और प्रोफेशनल लाइफ भी. दोनों अच्छे कलाकार ही नहीं एक उम्दा इंसान भी हैं.. वर्षों बाद एक देखने लायक शो आया है… जिसे परिवार के साथ सहजता से देखा जा सकता है,देखा ही जाना चाहिए.

