विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर (Jaishankar) ने भारत की वैश्विक भूमिका को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि भारत को केवल “मिडिल पावर” यानी मध्यम शक्ति के रूप में देखना अब सही नहीं है। उन्होंने एक विदेशी विदेश मंत्री के हवाले से कहा कि भारत “मिडिल पावर” नहीं, बल्कि “शक्ति के केंद्र में मौजूद एक ताकत” है। जयशंकर ने कहा कि भारत ऐसा देश है, जिसकी नियति अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में और ऊंचे स्थान तक पहुंचने की है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में “मिडिल पावर” उन देशों को कहा जाता है जो क्षेत्रीय या वैश्विक स्तर पर प्रभाव रखते हैं, लेकिन महाशक्तियों की श्रेणी में नहीं आते। लंबे समय तक भारत को इसी श्रेणी में रखा जाता रहा। हालांकि जयशंकर का मानना है कि आज का भारत इस परिभाषा से आगे निकल चुका है और वैश्विक फैसलों को प्रभावित करने की क्षमता हासिल कर रहा है।
विदेश नीति में भारत का बढ़ता दमखम
रूस-यूक्रेन युद्ध हो या पश्चिम एशिया का संकट, भारत ने कई मौकों पर स्वतंत्र और संतुलित रुख अपनाया है। जयशंकर लगातार “रणनीतिक स्वायत्तता” की नीति पर जोर देते रहे हैं, जिसके तहत भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेता है, न कि किसी एक गुट के दबाव में।
वैश्विक व्यवस्था में बड़ा बदलाव
विदेश मंत्री कई बार कह चुके हैं कि दुनिया अब एकध्रुवीय नहीं रही। उनके अनुसार शक्ति अब अलग-अलग देशों और क्षेत्रों में फैल रही है और कोई एक देश पूरी दुनिया पर वर्चस्व नहीं रखता। ऐसे बहुध्रुवीय दौर में भारत की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
ग्लोबल साउथ की बुलंद आवाज बनता भारत
भारत ने खुद को विकासशील और उभरते देशों की आवाज के रूप में भी स्थापित किया है। जी-20, ब्रिक्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत लगातार ग्लोबल साउथ के मुद्दों को उठाता रहा है।

