उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) के अब दिन बदलने वाले हैं। करीब 9 साल से बंद पड़े इस सेंटर का मुख्य गेट बुधवार को पहली बार खोला गया। अब जल्द ही इसे प्राइवेट कंपनी को सौंपने की प्रक्रिया शुरू होगी।
एलडीए के मुताबिक, सेंटर का हैंडओवर पूरा होने के बाद प्राइवेट कंपनी यहां मरम्मत और कायाकल्प का काम शुरू करेगी। लंबे समय से बंद रहने के कारण इमारत की हालत काफी खराब हो चुकी है।
831 करोड़ की लागत से बना था JPNIC
JPNIC को करीब 831 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था। लेकिन लंबे समय से इस्तेमाल नहीं होने के कारण इसके अंदर कई जगह सीलन, टूट-फूट और गंदगी जमा हो गई है।
कई मंजिलों की फर्श खराब हो चुकी है। दरवाजे और फर्नीचर भी जर्जर हालत में हैं। वहीं, स्विमिंग पूल में काई जम गई है और परिसर का एक बड़ा हिस्सा झाड़ियों और लताओं से घिर गया है।
200 से 250 करोड़ रुपये होंगे खर्च
JPNIC को दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाने में करीब 200 से 250 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह खर्च प्राइवेट कंपनी करेगी।
इस रकम से बिल्डिंग की फिनिशिंग, बिजली-पानी की व्यवस्था, सुरक्षा उपकरण, लिफ्ट, इंटीरियर और दूसरे जरूरी काम किए जाएंगे।
लिफ्ट और एस्केलेटर भी खराब
सालों से बंद रहने के कारण JPNIC की कई लिफ्ट खराब हो चुकी हैं। ऊपरी मंजिलों तक जाने के लिए लगाए गए एस्केलेटर में भी जंग लग गई है।
मरम्मत के दौरान इन्हें ठीक किया जाएगा या जरूरत पड़ने पर बदला जाएगा।
फर्नीचर और फर्श की हालत खराब
JPNIC के अंदर रखे कई सोफे, कुर्सियां और अन्य फर्नीचर लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं होने के कारण खराब हो गए हैं।
कई जगह फर्श की टाइल्स काली पड़ चुकी हैं। कुछ हिस्सों में फर्श के खराब होने और धंसने की स्थिति भी सामने आई है।
शीशे और दीवारों को भी करना होगा ठीक
इमारत के बाहरी हिस्से में लगे कई शीशे टूट चुके हैं। दीवारों पर लगे पत्थर और टाइल्स भी कई जगह उखड़ गए हैं।
इसलिए कंपनी को इंटीरियर के साथ-साथ इमारत के बाहरी हिस्से की भी मरम्मत करनी होगी।
बिजली और सुरक्षा व्यवस्था होगी दुरुस्त
लंबे समय से बंद रहने की वजह से बिजली के तार, जनरेटर और लाइटिंग सिस्टम भी प्रभावित हुए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को भी नए सिरे से तैयार करना होगा।
इसके अलावा बाउंड्री वॉल और मुख्य गेट से जुड़े बाकी काम भी पूरे किए जाएंगे।
हैलीपेड की भी होगी मरम्मत
JPNIC परिसर में बने हैलीपेड का इस्तेमाल भी लंबे समय से नहीं हुआ है। इसकी हालत भी खराब बताई जा रही है।
मरम्मत के दौरान हैलीपेड को भी दुरुस्त किया जाएगा।
600 से ज्यादा रिक्लाइनर चेयर का पता नहीं
JPNIC में दो बड़े हॉल बनाए गए थे, जिनमें 600 से ज्यादा रिक्लाइनर चेयर लगाए गए थे। अब इनमें से कई चेयर गायब बताए जा रहे हैं।
इन चेयर का क्या हुआ, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस संबंध में एलडीए की ओर से भी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
झाड़ियों के बीच सांप और दूसरे जानवरों का खतरा
लंबे समय से बंद रहने के कारण JPNIC का पिछला हिस्सा झाड़ियों से भर गया है और जंगल जैसा दिखाई देता है।
सुरक्षा कर्मचारियों के मुताबिक, परिसर में सांप और दूसरे जानवर भी दिखाई देते हैं। रात के समय चमगादड़ भी नजर आते हैं। ऐसे में मरम्मत शुरू करने से पहले पूरे परिसर की सफाई और सुरक्षा करना भी बड़ी चुनौती होगी।
2017 में रोक दिया गया था निर्माण
JPNIC का निर्माण 2015 में शुरू हुआ था। वर्ष 2017 में निर्माण पूरा होने से पहले ही काम रोक दिया गया था। उस समय फिनिशिंग और इंटीरियर के कुछ काम बाकी थे।
इसके बाद करीब 9 साल तक यह सेंटर बंद रहा। अब प्राइवेट कंपनी को इसकी जिम्मेदारी दिए जाने के बाद उम्मीद है कि JPNIC का फिर से कायाकल्प होगा और इसे जल्द आम लोगों के इस्तेमाल के लिए खोला जा सकेगा।

