नई दिल्ली: आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जिलों के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस कप्तानों (SSP/SP) को सरकारी मोबाइल नंबर उपलब्ध कराए जाते हैं। नियमों के मुताबिक इन नंबरों को संबंधित अधिकारियों के पास रहना चाहिए और लोगों की शिकायतें सीधे सुननी चाहिए। लेकिन एक दैनिक अखबार की पड़ताल में सरकारी नंबरों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर स्थिति सामने आने का दावा किया गया है।
PRO और स्टेनो के पास रहते हैं सरकारी फोन
रिपोर्ट के मुताबिक कई अधिकारी अपने सरकारी मोबाइल फोन पब्लिक रिलेशन ऑफिसर (PRO) या स्टेनो को दे देते हैं। इसके बाद यही कर्मचारी तय करते हैं कि किसी व्यक्ति की अधिकारी से बात कराई जाएगी या नहीं।
नियमों के अनुसार DM और SSP के सरकारी नंबर उनके पास रहना चाहिए और उन्हें जनता की समस्याएं सीधे सुननी चाहिए। इसका उद्देश्य यही है कि किसी व्यक्ति को अपनी समस्या बताने के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
सरकारी नंबरों पर करोड़ों रुपये का खर्च
लोगों की शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी मोबाइल नंबरों की सुविधा पर सरकार की ओर से बड़ी राशि खर्च की जाती है। रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ पुलिस विभाग के सरकारी नंबरों के रिचार्ज पर ही सालाना करीब 9 करोड़ रुपये खर्च होते हैं।
इसके बावजूद यदि सरकारी नंबर पर आम लोगों की बात अधिकारियों तक नहीं पहुंचती, तो व्यवस्था की उपयोगिता पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
सांसद-विधायक भी कर चुके हैं शिकायत
रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी नंबरों पर अधिकारियों के फोन नहीं उठाने की शिकायतें समय-समय पर सांसद और विधायक मुख्यमंत्री के सामने भी रखते रहे हैं। इसके बाद यह जानने की कोशिश की गई कि क्या वास्तव में DM और पुलिस कप्तान सरकारी नंबरों पर लोगों की कॉल नहीं उठाते हैं।
इसी सिलसिले में एक दैनिक अखबार ने देश के 75 जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस कप्तानों को फोन कर स्थिति की पड़ताल की।
तीन बार फोन करने पर सिर्फ 3 DM ने उठाया फोन
पड़ताल के दौरान प्रत्येक अधिकारी को एक बार नहीं, बल्कि तीन बार फोन किए जाने का दावा किया गया। रिपोर्ट के अनुसार 75 जिलों में से सिर्फ तीन जिलाधिकारियों ने खुद फोन उठाया।
वहीं, पुलिस कप्तानों की स्थिति इससे भी खराब बताई गई। रिपोर्ट के मुताबिक किसी भी SSP ने फोन खुद नहीं उठाया।
जनता से सीधा संवाद कितना जरूरी?
जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान जिला प्रशासन एवं पुलिस व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सरकारी नंबरों पर जनता की पहुंच सुनिश्चित करना प्रशासनिक जवाबदेही का अहम हिस्सा माना जाता है।
यदि सरकारी नंबर अधिकारियों के बजाय अन्य कर्मचारियों के पास रहते हैं और आम लोगों की सीधे बात नहीं हो पाती, तो इससे शिकायतों के त्वरित समाधान की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सरकारी मोबाइल नंबरों के इस्तेमाल और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं।

