NPCI ने मंगलवार को एक नोटिफिकेशन जारी कर बताया कि 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से ज्यादा के कुछ UPI ट्रांजैक्शन पर MDR शुल्क लागू किया जाएगा। इस खबर के सामने आने के बाद व्यापारियों और कारोबारियों के बीच चिंता बढ़ गई है।
अब इस फैसले पर RBI ने भी प्रतिक्रिया दी है। रिजर्व बैंक ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि MDR व्यवस्था डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी है।
RBI ने बताया MDR क्यों जरूरी है
RBI के मुताबिक, MDR से मिलने वाली रकम का सही तरीके से इस्तेमाल UPI के इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और पेमेंट रिसीविंग नेटवर्क में लगातार निवेश के लिए किया जा सकता है।
इससे देशभर में UPI की पहुंच बढ़ाने, नए ग्राहकों और कारोबारियों को जोड़ने और डिजिटल ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, UPI में नई सुविधाएं और बेहतर तकनीक विकसित करने के लिए भी निवेश किया जा सकेगा।
आम ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा शुल्क
RBI ने साफ किया है कि UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
यानी Person to Person (P2P) और Person to Merchant (P2M) दोनों तरह के UPI पेमेंट ग्राहकों के लिए मुफ्त रहेंगे।
वहीं, 2000 रुपये से कम के P2M UPI ट्रांजैक्शन व्यापारियों के लिए भी मुफ्त रहेंगे। हालांकि, 2000 रुपये से ज्यादा के कुछ P2M ट्रांजैक्शन पर व्यापारियों से MDR लिया जा सकता है।
MDR से क्या फायदा होगा?
RBI के अनुसार, MDR से मिलने वाली रकम को UPI इकोसिस्टम से जुड़े अलग-अलग पक्षों के बीच सही तरीके से बांटा जाएगा।
इससे UPI से जुड़ी टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, दुकानों और कारोबारियों के लिए UPI स्वीकार करने की सुविधाएं बढ़ाने और नए पेमेंट नेटवर्क तैयार करने में भी निवेश किया जा सकेगा।
UPI को सुरक्षित और मजबूत रखना लक्ष्य
RBI ने कहा कि उसका उद्देश्य UPI को सुरक्षित, आसान, सस्ता और ज्यादा से ज्यादा लोगों की पहुंच में बनाए रखना है।
साथ ही, भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ बनाए रखना भी जरूरी है।
इस तरह, नए MDR नियमों के बावजूद आम ग्राहकों के लिए UPI पेमेंट मुफ्त रहेगा, जबकि ज्यादा रकम वाले कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क का असर व्यापारियों पर पड़ सकता है।

