झारखंड(JHARKHAND): झारखंड में मानवता और संवेदनशीलता की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने हर दिल को छू लिया है। गिरिडीह की नन्ही बच्ची यामिका पटेल, जो स्पाइनल मस्कुलर अट्रॉफी (Type-1) जैसी दुर्लभ और गंभीर बीमारी से जूझ रही है, अब उसे नई जिंदगी मिलने की उम्मीद जगी है।
इस बीमारी के इलाज के लिए जिस इंजेक्शन की कीमत लगभग 15 करोड़ रुपये है, वह आम परिवार के लिए असंभव था। माता-पिता अपनी बच्ची को बचाने के लिए दर-दर भटक रहे थे।
ऐसे कठिन समय में झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी उनके लिए मसीहा बनकर सामने आए। उन्होंने न सिर्फ बच्ची की स्थिति को गंभीरता से लिया, बल्कि दृढ़ संकल्प के साथ कहा —
“इस बच्ची को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा, चाहे कितनी भी लागत आए।”
मंत्री जी की पहल और लगातार मॉनिटरिंग का ही परिणाम है कि लोकप्रिय मुख्यमंत्री Hemant Soren जी और विधायक कल्पना सोरेन जी Kalpana Murmu Soren के सहयोग से कैबिनेट ने 15 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक सहायता को मंजूरी दी।
इस फैसले ने एक परिवार के आंसुओं को उम्मीद में बदल दिया।
जो माता-पिता अपनी पूरी संपत्ति बेचकर भी इलाज नहीं करा सकते थे, आज उनकी आंखों में अपनी बच्ची के भविष्य की चमक दिखाई दे रही है।
मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा —
“अब झारखंड में कोई भी परिवार इलाज के अभाव में अपने बच्चे को नहीं खोएगा। सरकार हर जरूरतमंद के साथ मजबूती से खड़ी है।”
यह निर्णय सिर्फ एक मदद नहीं, बल्कि झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र में मानवता, संवेदनशीलता और संकल्प का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है।
“आंसुओं से उम्मीद तक — यह बदलाव संभव हुआ है एक संवेदनशील मंत्री की मजबूत इच्छाशक्ति से।”
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

