होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान-ओमान की बड़ी तैयारी, जहाजों से सर्विस फीस लेने की योजना

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान-ओमान की बड़ी तैयारी, जहाजों से सर्विस फीस लेने की योजना

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के ट्रैफिक को मिलकर नियंत्रित करने और जहाजों से सर्विस फीस लेने की योजना पर काम कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि दोनों देश इस समझौते के काफी करीब हैं।

अगर यह समझौता होता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बिना अमेरिका की सीधी भूमिका के जारी रह सकती है। हालांकि, इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान और ओमान दोनों नजर रखेंगे।

कैसे होगा जहाजों का संचालन?

रिपोर्ट के अनुसार, फारस की खाड़ी से आने वाले जहाज ईरान के तट के पास उत्तरी मार्ग से गुजरेंगे, जबकि अरब सागर की ओर जाने वाले जहाज ओमान के पास दक्षिणी मार्ग का इस्तेमाल करेंगे।

सर्विस फीस लेने की तैयारी

ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इसे टोल टैक्स नहीं कहा जाएगा, बल्कि सर्विस फीस के रूप में भुगतान लिया जाएगा। इस पैसे का इस्तेमाल समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा और तेल टैंकरों की सुरक्षा व्यवस्था पर किया जाएगा। बताया जा रहा है कि इस फीस से होने वाली आय ईरान और ओमान के बीच बराबर बांटी जाएगी।

अमेरिका ने जताई चिंता

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर कोई देश अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर नियंत्रण कर जहाजों से शुल्क वसूलने लगे, तो यह दुनिया के लिए एक खतरनाक उदाहरण बन सकता है।

अमेरिका ने ईरान-ओमान के प्रस्ताव का विरोध किया
अमेरिका ने ईरान और ओमान के बीच होने वाली इस डील का विरोध किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि वॉशिंगटन कोई ऐसा एग्रीमेंट स्वीकार नहीं करेगा, जो फ्री नेविगेशन को बहाल करने में नाकाम रहता है।

एक शीर्ष अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले जहाजों को ईरान की मंजूरी की कोई जरूरत नहीं होगी और उसके लिए कोई फीस भी नहीं देनी होगी। उन्होंने कहा कि यह एक इंटरनेशनल रास्ता है, जिस पर कोई देश मनमानी नहीं कर सकता है।

भारत की बढ़ सकती है मुश्किलें
होर्मुज जलडमरूमध्य पर सर्विस फीस वसूल करने की ईरान और ओमान की योजना से भारत को तगड़ा झटका लग सकता है। भारत होर्मुज के रास्ते भारी मात्रा में तेल और गैस का आयात करता है। इसके अलावा खाड़ी देशों के साथ व्यापार के लिए भी इस रूट का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में अगर होर्मुज को पार करने के लिए सर्विस फीस देना पड़ता है, तो इससे भारतीय ऊर्जा आयात की लागत बढ़ सकती है। अगर ऐसा होता है तो इसका असर तेल और गैस की कीमतों में देखने को मिल सकता है।

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