DESK: मिडिल ईस्ट के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। भारत के दो टैंकरों पर उस वक्त गोलीबारी हुई, जब वे इस जलडमरूमध्य को पार कर रहे थे। सुरक्षा कारणों से इन जहाजों को बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा।
इस घटना के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। दिल्ली में ईरान के राजदूत फतहली को तलब कर इस पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया।
दिलचस्प बात यह है कि यह हमला ऐसे समय में हुआ, जब अब्बास अराघची पहले ही घोषणा कर चुके थे कि सीजफायर तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को खोल दिया गया है, ताकि जहाजों की आवाजाही सामान्य रह सके।
इस विरोधाभास ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या जमीनी हकीकत और सरकारी बयानों में फर्क है? क्या ईरान के भीतर अलग-अलग ताकतों के बीच तालमेल की कमी है?
फिलहाल इतना साफ है कि होर्मुज़ तकनीकी रूप से खुला जरूर है, लेकिन वहां से गुजरना अब भी बेहद जोखिम भरा बना हुआ है।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

