स्वतंत्र भारद्वाज को ‘दिमागी नक्सल’ कहने के आरोप को लेकर बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया और सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास के बीच तीखी बहस देखने को मिली। मामला एक सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ, जिसे सौरव दास ने शेयर किया था।
दास ने दावा किया था कि गौरव भाटिया ने स्वतंत्र भारद्वाज को ‘दिमागी नक्सल’ कहा है। इस पोस्ट पर भाटिया ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे फर्जी बताया। उन्होंने दास को पोस्ट हटाने और बिना शर्त माफी मांगने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया।
बाद में सौरव दास ने वह पोस्ट हटा दिया। उन्होंने एक्स पर सफाई देते हुए कहा कि पोस्ट AI की मदद से बनाया गया था। हालांकि, उन्होंने बीजेपी नेताओं को चुनौती दी कि वे वही बात दोहराकर कहें और भाटिया से व्यक्तिगत रूप से पूछा कि क्या वह इस बयान से सहमत नहीं हैं।
क्या था सौरव दास का पोस्ट?
सौरव दास की ओर से शेयर किए गए पोस्ट में लिखा गया था कि स्वतंत्र भारद्वाज ‘दिमागी नक्सल’ हैं और उनके अंदर जातिवाद का जहर है। पोस्ट में यह भी दावा किया गया था कि बीजेपी का स्वतंत्र भारद्वाज से कोई संबंध नहीं है।
इस पर गौरव भाटिया ने प्रतिक्रिया देते हुए पोस्ट को फर्जी बताया। उन्होंने सौरव दास से कहा कि पोस्ट हटाकर बिना शर्त माफी मांगने के लिए उनके पास 24 घंटे का समय है।
स्वतंत्र भारद्वाज पर क्या है मामला?
यह पूरा विवाद जंतर-मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान सीजेपी एक्टिविस्ट निशु आजाद के पिता संजय कुमार पर कथित हमले से जुड़ा है।
सीजेपी की ओर से आरोप लगाया गया है कि स्वतंत्र भारद्वाज और कुछ अन्य लोगों ने संजय कुमार पर हमला किया था। वहीं, भारद्वाज ने एक पॉडकास्ट में कथित तौर पर दावा किया था कि उन्होंने निशु आजाद के पिता का सिर फोड़ दिया था।
उन्होंने यह भी कहा था कि इसके बावजूद उन्हें जेल नहीं हुई और वह पूरी रात बाहर घूमते रहे।
पुलिस ने किया गिरफ्तार
सीजेपी और कांग्रेस की टीम ने शुक्रवार को संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ केस दर्ज किया।
पुलिस ने देर रात उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद शनिवार को पटियाला कोर्ट ने पुलिस को स्वतंत्र भारद्वाज की एक दिन की रिमांड दे दी।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपों से जुड़े तथ्यों को जुटाया जा रहा है।

