आरा के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच तेजी से चल रही है। इस मामले में चार पुलिसकर्मियों ने न्यायिक आयोग के सामने अपना बयान दर्ज कराया।
पुलिसकर्मियों ने बताया कि भरत भूषण तिवारी पहले आत्मसमर्पण करने का दिखावा करते थे और अपनी पिस्टल कुछ दूरी पर फेंक देते थे। लेकिन जैसे ही पुलिस हथियार जब्त करने के लिए आगे बढ़ती, वह तुरंत पिस्टल उठाकर पुलिस पर फायरिंग शुरू कर देते थे। पुलिस के अनुसार, वह इस तरह पुलिस को चुनौती देते हुए गोलीबारी करते थे। फिलहाल न्यायिक आयोग पूरे मामले की जांच कर रहा है।
भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में पीड़ित पक्ष के बाद पुलिस पक्ष की गवाही शुरू हो गई है। गुरुवार को जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, केस के आईओ इंस्पेक्टर संजीव कुमार और एसटीएफ के एक अवर निरीक्षक की गवाही हुई। सभी ने न्यायिक आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा के सामने अपना बयान दर्ज कराया।
बताया जा रहा है कि एसडीपीओ और थानाध्यक्ष की ओर से 16 जून से एनकाउंटर तक के पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने आयोग को दिए बयान में बताया कि अवैध हथियार और फायरिंग करने को लेकर पुलिस भरत भूषण तिवारी के घर पहुंची थी। 17 जून की सुबह घेराबंदी के दौरान भरत भूषण तिवारी फायरिंग कर रहा था।
तत्कालीन पुलिसकर्मियों ने बताया कि बार-बार सरेंडर करने को कहा जा रहा था, लेकिन वो पुलिस को छका रहा था। आत्मसमर्पण का दिखावा करते हुए अपनी पिस्टल को कुछ दूरी पर फेंक दे रहा था। लेकिन पुलिस पिस्टल जब्त करने के लिए आगे बढ़ती, तो तेजी से लपक कर दोबारा पिस्टल उठा ले रहा था और चैलेंज करते हुए पुलिस पर फायरिंग करने लगता था। बाएं हाथ में मोबाइल और दाहिने हाथ में पिस्टल लेकर गाली देते हुए पुलिस को चैलेंज करता रहा। उसकी ओर से लगातार फायरिंग करने से आम जनमानस को भी खतरा उत्पन्न होने लगा था।
उन्होंने बताया कि काफी समझाने पर वह सरेंडर करने के तैयार हो गया। पिस्टल भी फेंक दिया। लेकिन एक जवान पिस्टल जब्त करने पहुंचा, तो उसने फिर पिस्टल उठा लिया और दो राउंड फायरिंग कर दी। उस अचानक जानलेवा हमले के बाद आत्मरक्षार्थ पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी थी। उस दौरान भरत भूषण तिवारी को गोली लगी थी, जिनकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस मामले में अन्य पुलिस अधिकारियों और जवानों का शुक्रवार को बयान दर्ज कराया जाएगा।
‘पीड़ित परिवार के हर गवाह को मिलेगा मौका’
न्यायिक आयोग के सचिव सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच की प्रथम चरण की गवाही अंतिम दौर में है। इसके बाद दूसरे चरण की गवाही शुरू होगी। गवाही पूरी होने के बाद सार्वजनिक तौर पर आम जन से भी साक्ष्यों की मांग की जायेगी। उस दौरान आम लोग शपथ पत्र के जरिए घटना के संबंध में अपनी बात रख सकते हैं और साक्ष्य भी उपलब्ध करा सकते हैं। वहीं, दोनों पक्षों के मुख्य गवाहों के बयान कलमबंद होने के बाद न्यायिक जांच आयोग की ओर से सरकार को अंतरिम रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
आत्मसमर्पण का दिखावा करते हुए अपनी पिस्टल को कुछ दूरी पर फेंक दे रहे था। लेकिन पुलिस पिस्टल जब्त करने के लिए आगे बढ़ती, तो तेजी से लपक कर दोबारा पिस्टल उठा ले रहे थे-पुलिस का बयान दर्ज
उन्होंने कहा कि न्यायिक आयोग के अध्यक्ष के निर्देशन में 11 जुलाई से पीड़ित पक्ष की गवाही हो रही है। पीड़ित परिवार के सदस्यों और विस्थापितों सहित नौ गवाहों का बयान दर्ज किए गए हैं। गुरुवार से पुलिस पक्ष की गवाही हो रही है। पहले दिन जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, एसटीएफ के एक अवर निरीक्षक और कांड के अनुसंधान अधिकारी संजीव कुमार का बयान दर्ज किया गया। इसके बाद दूसरे चरण की गवाही होगी। उसमें प्रथम चरण में किसी कारण गवाही देने से वंचित रह गए साक्षियों का बयान दर्ज किए जाएंगे।
इसके बाद सार्वजनिक तौर पर आम लोगों से साक्ष्य मांगे जाएंगे। इसके तहत हर कोई शपथ पत्र के जरिए साक्ष्य और अपनी बात रख सकते हैं। आयोग आवश्यकतानुसार उनके बयान दर्ज कर सकता है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार जो भी साक्ष्य या गवाह लाना चाहेंगे, उन सबको मौका मिलेगा। किसी पर रोक नहीं है। न्यायिक जांच आयोग की कार्रवाई का मतलब ही है कि आम जन के पास भी अगर कोई साक्ष्य है या कुछ जानता है, तो शपथ के जरिए बता सकता है। सचिव ने कहा कि पूरी पारदर्शिता तरीके से गवाही हो रही है।
भोजपुर पुलिस की ओर से विभिन्न मीडिया माध्यमों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भरत तिवारी एनकाउंटर कांड से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट से कुछ महत्वपूर्ण वीडियो डिलीट किए जाने से संबंधित प्रसारित खबर को भ्रामक बताया गया है। कहा गया है कि प्रसारित हो रही खबर में वीडियो डिलीट करने में पुलिस की संलिप्तता का संदेह व्यक्त किया जा रहा है। पुलिस इस भ्रामक और तथ्यों से परे इस खबर का पूर्ण रूप से खंडन करती है। भोजपुर पुलिस की ओर से जारी प्रेस बयान में कहा गया है कि इस संवेदनशील मामले में साक्ष्यों की सुरक्षा और निष्पक्ष अनुसंधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भोजपुर पुलिस की ओर से तकनीकी एवं कानूनी स्तर पर ठोस कदम उठाए गए हैं।
पुलिस की ओर से सोशल मीडिया अकाउंट से किसी भी प्रकार के पोस्ट या वीडियो को हटाने या डिलीट करने के लिए कोई प्रतिवेदन या अनुरोध संबंधित नोडल प्राधिकारी को समर्पित नहीं किया गया है। ऐसे में साक्ष्यों की लीपापोती के संबंध में लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार एवं असत्य हैं। साक्ष्यों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध रहते हुए भोजपुर पुलिस की ओर से उक्त सोशल मीडिया आईडी को भविष्य के अनुसंधान के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित या संरक्षित रखने के लिए संबंधित नोडल प्राधिकारी को विधिवत साक्ष्यों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध रहने को कहा गया है।
किसी भी प्रकार के पोस्ट या वीडियो को हटाने या डिलीट करने के लिए कोई प्रतिवेदन या अनुरोध संबंधित नोडल प्राधिकारी को समर्पित नहीं किया गया है। ऐसे में साक्ष्यों की लीपापोती के संबंध में लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार एवं असत्य हैं-भोजपुर पुलिस
सोशल मीडिया आईडी को भविष्य के अनुसंधान के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित या संरक्षित रखने से संबंधित नोडल प्राधिकारी को विधिवत प्रतिवेदन समर्पित किया गया है, ताकि डिजिटल साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके। सोशल मीडिया पर वीडियो डिलीट किए जाने संबंधी अफवाह फैलने से पूर्व ही इस कांड के संबंधित अनुसंधानकर्ता की ओर से अपनी सूझबूझ और त्वरित तकनीकी कार्रवाई करते हुए उक्त आईडी का पिछले छह महीनों का संपूर्ण विवरण डिजिटल रूप से पूरी तरह सुरक्षित रख लिया गया है।

