सदर अस्पताल के आइपीडी में 542%, ओपीडी में 199% की वृद्धि, ऑर्थोपेडिक सर्जरी में 409% की वृद्धि

सदर अस्पताल के आइपीडी में 542%, ओपीडी में 199% की वृद्धि, ऑर्थोपेडिक सर्जरी में 409% की वृद्धि

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की दृढ़ इच्छाशक्ति के फलस्वरूप विगत एक वर्ष में धनबाद के हृदय स्थल पर स्थित सदर अस्पताल की सूरत और सीरत दोनों में अभूतपूर्व बदलाव आया है। पिछले एक वर्ष में चिकित्सा सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और पारदर्शी प्रबंधन के कारण न केवल अस्पताल की साख मजबूत हुई है, बल्कि आम जनमानस का भरोसा भी सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर तेजी से बढ़ा है। आज सदर अस्पताल अपनी गुणवत्तापूर्ण और त्वरित चिकित्सा सेवाओं के बूते केवल जिले के मरीजों के लिए नहीं बल्कि पड़ोसी जिले और पड़ोसी राज्य के आमजनों की पहली और विश्वसनीय पसंद बनकर उभरा है। जिसके परिणाम स्वरूप सदर अस्पताल ने आईपीडी, ओपीडी, जटिल ऑपरेशन में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की है।

मीडिया को इसकी विस्तृत जानकारी देते हुए उपायुक्त श्री आदित्य रंजन एवं उप विकास आयुक्त श्री सन्नी राज ने बताया कि सदर अस्पताल के आइपीडी में जहां जनवरी से मई 2025 तक केवल 696 मरीज भर्ती थे वहीं जून 2025 से मार्च 2026 तक इसमें 542% वृद्धि के साथ 4,466 मरीज भर्ती हुए और सफल इलाज कराकर डिस्चार्ज हुए। वहीं ओपीडी में जनवरी से मई 2025 तक जहां 35,008 मरीज आए वहीं जून 2025 से मार्च 2026 तक 1,04,702 मरीज सदर अस्पताल में आए। अस्पताल की मासिक औसत 7,000 से बढ़कर 10,470 हुई। जो लगभग 199% की वृद्धि है।

अस्पताल में मोतियाबिंद ऑपरेशन सेवा भी प्रारंभ हुई

उन्होंने बताया कि इसके अलावा अस्पताल में मोतियाबिंद ऑपरेशन सेवा भी प्रारंभ हुई है। जून 2025 से मार्च 2026 तक 388 ऑपरेशन हुए हैं। अक्टूबर 2025 से ऑर्थोपेडिक सर्जरी सेवा भी प्रारंभ की गई। मार्च 2026 तक 10 सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

सदर अस्पताल में पहली बार ऑर्थोपेडिक सर्जरी की सुविधा आमजनों को उपलब्ध हुई है। पहले जहां जनवरी से मई 2025 तक केवल 47 सर्जरी हुई वहीं जून 2025 से मार्च 2026 तक 239 सर्जरी संपन्न हुई। मासिक औसत भी 10 से बढ़कर 24 हुई। जो लगभग 409% वृद्धि दर्शाता है। अस्पताल ने सीजेरियन डिलीवरी में बड़ी प्रगति हासिल की है। जनवरी से मई 2025 तक जहां 162 डिलीवरी हुई वहीं जून 2025 से मार्च 2026 तक 1,100 डिलीवरी सफलतापूर्वक संपन्न हुई। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में भी महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।

मॉडल कुपोषण उपचार केंद्र में जनवरी-मई 2025 तक 17 बच्चों का उपचार हुआ। जबकि जून 2025-मार्च 2026 तक 211 गंभीर कुपोषित बच्चों का उपचार किया गया।

इसके अलावा आधारभूत सरंचना की दिशा में नया रजिस्ट्रेशन काउंटर का निर्माण, पार्किंग शेड, चाहरदीवारी का निर्माण, अतिरिक्त भवन व वर्तमान भवन पर अतिरिक्त फ्लोर का निर्माण, अत्याधुनिक उपकरणों से लैस 12 बेड क्षमता वाला एमएनसीयू, 14 बेड क्षमता वाला मॉडल एमटीसी सेंटर शुरू किया गया है। एमटीसी में अभी तक 230 एसएएम और एमएएम बच्चों को बेहतर इलाज एवं पोषण सुविधा दी गई है। उन्होंने बताया कि चुकी अब सदर अस्पताल में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं इसलिए उनके खान-पान की व्यवस्था के लिए दीदी कैफे का संचालन भी शुरू किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि सदर अस्पताल में विश्वस्तरीय और संक्रमण मुक्त ऑपरेशन थियेटर बनने से जटिल सर्जरियों की सफलता दर बढ़ेगी और गरीब मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। वहीं आइसीयू व सीसीयू की स्थापना से गंभीर और हृदय रोगियों को ‘गोल्डन ऑवर’ में तुरंत इलाज मिलेगा, जिससे बड़े शहरों में रेफर करने की नौबत नहीं आएगी और जानें बचेंगी।

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवा को सुदृढ़ करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती जारी है। सभी सदर अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की सीधी नियुक्ति से ग्रामीण व अर्ध-शहरी मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही उच्च स्तरीय परामर्श मिलेगा और सरकारी तंत्र पर भरोसा बढ़ेगा। आधुनिक मेडिकल टेक्नोलॉजी से लैस करने से बीमारियों की सटीक व जल्दी जांच होगी, जिससे मरीजों का समय और इलाज का खर्च दोनों घटेगा। वहीं जिले की स्वास्थ्य सेवा को और बेहतर बनाने के लिए 1000 से अधिक सहिया को प्रशिक्षण दिया गया है। ताकि वे सही तरीके से डाटा एंट्री कर सके एवं जमीन स्तर पर आम जनों से स्वास्थ्य सेवा की विस्तृत चर्चा कर सकें।

बताया कि इसके अलावा 7 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कंगारू मदर केयर की स्थापना से समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले नवजात शिशुओं की जान बचेगी और शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी। बताया कि जिला विकलांग पुनर्वास केंद्र के मजबूत होने से दिव्यांगजनों को एक ही छत के नीचे सहायक उपकरण और थेरेपी मिलेगी, जिससे वे आत्मनिर्भर होकर मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।

बताया कि जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को मॉडल के रूप में तब्दील कर सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) पीजी कैंपस में 200 बेड का सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल तैयार किया गया है। हॉस्पिटल में 160 जनरल बेड, 40 आइसीयू बेड और 8 मॉड्यूलर ओटी बनाए गए हैं। यहां मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण लंबे समय से लंबित ओपीडी की सुविधा शुरू है।

बताया कि वर्तमान में सुपर स्पेशियलिटी में कार्डियोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी, मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, नेफ्रोलॉजी ओपीडी शुरू है।

वहीं सुपर स्पेशियलिटी में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं व्यापक बनाने के लिए 40 बेड वाले अत्याधुनिक आईसीयू, 7 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर को क्रियाशील करने का कार्य प्रगति पर है। प्रथम चरण में कार्डियोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी एवं गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागों के इंडोर वार्ड को संचालित किया जाएगा। कैथ लैब को क्रियाशील बनाया जाएगा। एमआरआई, सीटी स्कैन, डायलिसिस मशीनों व दो मोबाइल एक्स-रे मशीनों की स्थापना का कार्य प्रगति पर है।

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