दिल्ली में सीजेपी के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई हिंसा को लेकर अब दिल्ली पुलिस महासंघ का बयान सामने आया है। महासंघ ने पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों को नहीं रोका जाता, तो वे संसद तक पहुंच सकते थे और स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
महासंघ की ओर से पूर्व एसीपी केपी कुकरेती ने कहा कि पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की। उनके अनुसार, अगर पुलिस समय पर हस्तक्षेप नहीं करती, तो हालात और बिगड़ सकते थे।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी पुलिस अधिकारी की जान को वास्तविक खतरा हो, तो कानून के तहत वह आवश्यक कार्रवाई कर सकता है। उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में मौके पर मौजूद अधिकारी परिस्थितियों के अनुसार फैसला लेते हैं।
गौरतलब है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। इस दौरान दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने भीड़ को रोकने के लिए कार्रवाई की थी।
“पुलिस के पास क्या साधन है…या तो उन्हें पार्लियामेंट में घुसने देते…तो इससे बड़ी घटना घटती। गोली चलानी ही पड़ती और यह कानून में लिखा हुआ है”-केपी कुकरेती, पूर्व एसीपी
‘संसद में घुसने से बड़ी अराजकता क्या होती’
दिल्ली पुलिस महासंघ की ओर से कहा गया कि ‘वहां पर न गवर्नर साहब, न सीएम, न होम मिनिस्टर। मौके पर सीनियर अफसर या मौके का अफसर उसको डिसाइड करेगा कि मुझे अपनी जान या पब्लिक की जान या जो पब्लिक प्रॉपर्टी है, चाहे वह पार्लियामेंट है या पार्लियामेंटिरयन हैं, उनको कैसे बचाना है?’
“इससे बड़ी अराजकता क्या होती, अगर लोग पार्लियामेंट में घुस जाते। हमारे लिए एक अंतरराष्ट्रीय शर्म की बात होती,लोग यह समझने लगते कि भारत की पुलिस अपनी संसद की रक्षा करने में भी सक्षम नहीं है।”-केपी कुकरेती, पूर्व एसीपी
20 जुलाई को किन हालातों में हुई पुलिस कार्रवाई?
- पूर्व पुलिस अधिकारी के अनुसार जब कोई भीड़ बेकाबू हो जाती है और गैर-कानूनी जमावड़े से हालात बिगड़ जाते हैं तो उसमें शामिल हर सदस्य कानूनी तौर पर जिम्मेदार होता है।
- कानून के शब्दों में गैर-कानूनी जमावड़े में शामिल हर सदस्य एक आरोपी है।
- उनका कहना है ‘भीड़ हिंसक हो चुकी थी, लाठी, पत्थर मार रही थी, बैरिकेड तोड़ रहे थे, सेक्शन 163 की चेतावनी नजरअंदाज कर दी गई थी। फिर पुलिस के पास क्या विकल्प बच जाते हैं।’
- दिल्ली पुलिस महासंघ के मुताबिक इस प्रदर्शन में शामिल बच्चे भी उनके बच्चे हैं।
- उनके बच्चे भी ऐसे ही उम्र के हैं, उनका नजरिया भले ही अलग हो सकता है।
- पुलिस महासंघ ने यह भी सवाल उठाया है कि ‘पुलिस वालों पर हमला करने वाले कौन थे?’
- ‘128 पुलिस वालों किसने जख्मी किया?’
- ‘अगर पुलिस पर उनपर कार्रवाई के आरोप लग रहे हैं तो हम पर किसने हमले किए? और हमें इन सवालों का जवाब चाहिए। इस वजह से सरकार जिस तरह से काम कर रही है, उससे हम संतुष्ट हैं।’

