रेजीनगर उपचुनाव में बड़ा बदलाव, नामांकन वापस लेने के फैसले से पीछे हटे रबीउल आलम

रेजीनगर उपचुनाव में बड़ा बदलाव, नामांकन वापस लेने के फैसले से पीछे हटे रबीउल आलम

पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में शनिवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया। ममता बनर्जी के खेमे के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने पहले चुनाव से हटने और नामांकन वापस लेने की बात कही थी। बाद में उन्होंने अपना फैसला बदल दिया और चुनाव मैदान में बने रहने का निर्णय लिया।

पहले क्यों पीछे हटना चाहते थे रबीउल?

रबीउल आलम ने नामांकन वापस लेने की घोषणा करते हुए चुनाव चिह्न और चुनाव प्रचार से जुड़ी दिक्कतों का हवाला दिया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रचार करने से रोका जा रहा है और कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।

उन्होंने कहा था कि ऐसी परिस्थितियों में चुनाव लड़ना मुश्किल हो रहा है।

ममता बनर्जी से बातचीत के बाद बदला फैसला

बाद में रबीउल आलम ने ममता बनर्जी और पार्टी नेताओं से बातचीत की। इसके बाद उन्होंने अपना फैसला बदल लिया और रेजीनगर उपचुनाव लड़ने का निर्णय किया। रिपोर्टों के मुताबिक, ममता बनर्जी के कहने पर उन्होंने नामांकन वापस लेने का फैसला बदला।

रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को होना है और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।

नंदीग्राम में भी बदला चुनावी समीकरण

इससे एक दिन पहले नंदीग्राम में ममता बनर्जी के खेमे की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद ममता बनर्जी के खेमे ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया।

इसके कुछ घंटे बाद मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक, उनके खिलाफ लंबित वारंट थे। गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस और ममता खेमे ने कार्रवाई के समय पर सवाल उठाए।

रेजीनगर में फिलहाल रबीउल मैदान में

रबीउल आलम के फैसले में बदलाव के बाद अब वह रेजीनगर उपचुनाव में ममता बनर्जी के खेमे के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में बने हुए हैं। इससे नामांकन वापसी के आखिरी दिन रेजीनगर की चुनावी स्थिति फिर बदल गई है।

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