पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव को लेकर शनिवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला। ममता बनर्जी के खेमे के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने पहले चुनाव से हटने और नामांकन वापस लेने की बात कही थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपना फैसला बदल दिया। अब रबीउल ने साफ किया है कि वह चुनाव मैदान में बने रहेंगे।
पहले चुनाव से हटने की कही थी बात
रबीउल आलम चौधरी ने पहले नामांकन वापस लेने की बात कही थी। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने नए चुनाव चिह्न, प्रचार के लिए कम समय और पार्टी कार्यकर्ताओं पर दबाव जैसी समस्याओं का हवाला दिया था।
इसके बाद ममता बनर्जी से बातचीत हुई और रबीउल ने अपना फैसला बदलने का निर्णय लिया। अब वह रेजीनगर उपचुनाव लड़ेंगे।
रेजीनगर में क्या हुआ?
रेजीनगर उन सीटों में शामिल है जहां 6 अक्टूबर 2026 को विधानसभा उपचुनाव होना है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख 19 सितंबर थी। रबीउल के फैसले में बदलाव के बाद इस सीट पर चुनावी मुकाबला जारी रहेगा।
नंदीग्राम में भी बदला चुनावी समीकरण
रेजीनगर से पहले नंदीग्राम में भी बड़ा घटनाक्रम हुआ। ममता बनर्जी के खेमे की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की।
लेकिन समर्थन की घोषणा के कुछ घंटे बाद मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े पुराने मामलों में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार उनके खिलाफ लंबित वारंट थे।
गिरफ्तारी पर राजनीतिक विवाद
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस और ममता बनर्जी के खेमे ने कार्रवाई के समय पर सवाल उठाए और इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया। दूसरी ओर, पुलिस की ओर से बताया गया कि गिरफ्तारी लंबित वारंट से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई। इन दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
इस तरह रेजीनगर में रबीउल आलम के फैसले में बदलाव और नंदीग्राम में उम्मीदवार बदलने तथा गिरफ्तारी के घटनाक्रम से पश्चिम बंगाल के उपचुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

