नई दिल्ली: रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिका का दबाव बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाला बिल पास कर दिया। इस बिल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों के सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। अब बिल राष्ट्रपति ट्रंप के पास भेजा गया है।
इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लग गया है। अगर ट्रंप इसका इस्तेमाल करते हैं, तो इसका असर अमेरिका में जाने वाले भारतीय सामान पर पड़ेगा, सीधे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत पर नहीं।
1. भारत कितना रूसी तेल खरीदता है?
रूस पिछले कुछ सालों में भारत के बड़े कच्चे तेल सप्लायरों में शामिल हो गया है। GTRI के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 30.3% थी। जुलाई 2026 में यह हिस्सेदारी अनुमान के आधार पर करीब 52% तक पहुंच गई थी।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने या सप्लाई में रुकावट आने का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
2. क्या रूस से तेल खरीदना बंद हुआ तो पेट्रोल तुरंत महंगा होगा?
जरूरी नहीं। अगर रूस से तेल की खरीद कम होती है, तो भारतीय कंपनियां दूसरे देशों से कच्चा तेल खरीद सकती हैं।
भारत मध्य पूर्व, अमेरिका, अफ्रीका और दूसरे देशों से भी तेल खरीदता है। लेकिन अगर रूस की जगह दूसरे देशों से महंगा तेल खरीदना पड़ेगा, तो रिफाइनरियों की लागत बढ़ सकती है।
इसका असर आखिर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है, लेकिन कीमत कितनी बढ़ेगी, यह अभी तय नहीं किया जा सकता।
3. दुनिया में कच्चे तेल की कीमत बढ़ी तो क्या होगा?
अगर सिर्फ भारत रूसी तेल की खरीद कम करता है, तो भारत दूसरे देशों से तेल खरीद सकता है। लेकिन अगर रूस की बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई अंतरराष्ट्रीय बाजार से हटती है, तो दुनिया में कच्चे तेल की कुल सप्लाई कम हो सकती है।
ऐसी स्थिति में वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल महंगा हो सकता है। इसका असर भारत समेत तेल आयात करने वाले कई देशों पर पड़ेगा।
4. क्या भारत रूस की जगह दूसरे देशों से तेल ले सकता है?
हां, लेकिन इसमें कुछ चुनौतियां हैं। हर कच्चा तेल हर रिफाइनरी के लिए एक जैसा नहीं होता। रिफाइनरी की तकनीक के हिसाब से अलग-अलग तरह के क्रूड की जरूरत होती है।
इसके अलावा तेल की कीमत, शिपिंग, बीमा और सप्लाई की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। अगर कई देश एक साथ वैकल्पिक तेल खरीदने लगें, तो कीमत और बढ़ सकती है।
5. पेट्रोल की कीमत कैसे तय होती है?
पेट्रोल की कीमत सिर्फ कच्चे तेल के दाम से तय नहीं होती। इसमें कई चीजें शामिल होती हैं, जैसे:
- कच्चे तेल की कीमत
- रिफाइनिंग की लागत
- परिवहन और अन्य खर्च
- डीलर का कमीशन
- केंद्र का एक्साइज ड्यूटी
- राज्य सरकारों के टैक्स
इसलिए अगर कच्चा तेल महंगा होता है, तो जरूरी नहीं कि उसका पूरा असर तुरंत पेट्रोल पंप की कीमत पर दिखाई दे।
6. पेट्रोल कितना महंगा हो सकता है?
अभी इसका कोई निश्चित आंकड़ा बताना संभव नहीं है। असर इस बात पर निर्भर करेगा कि रूस से तेल की सप्लाई कितनी कम होती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत कितनी बढ़ती है।
पहली स्थिति: भारत दूसरे देशों से तेल खरीद ले और ग्लोबल कीमतें ज्यादा न बढ़ें। ऐसे में पेट्रोल पर असर सीमित रह सकता है।
दूसरी स्थिति: रूसी तेल की सप्लाई कम हो और अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा हो जाए। ऐसे में भारत की तेल खरीद लागत बढ़ सकती है।
तीसरी स्थिति: रूस के साथ-साथ पश्चिम एशिया से भी तेल की सप्लाई प्रभावित हो जाए। ऐसी स्थिति में वैश्विक तेल कीमतों पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है और भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों को संभालना मुश्किल हो सकता है।
7. 100% अमेरिकी टैरिफ का भारत पर क्या असर होगा?
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि 100% टैरिफ अभी भारत पर लागू नहीं हुआ है। अमेरिकी हाउस से पास हुआ बिल राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।
अगर ऐसा टैरिफ भारत पर लगाया जाता है, तो इसका सीधा असर अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले भारतीय सामान पर पड़ेगा। इससे भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में सामान बेचना महंगा हो सकता है।
वहीं, इसका अप्रत्यक्ष असर भारत की अर्थव्यवस्था और रूस से तेल खरीदने की नीति पर पड़ सकता है। लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे भारत में पेट्रोल की कीमत कितनी बढ़ेगी।

