राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद वंदे मातरम पर बोले शशि थरूर, कहा- बिना चर्चा के पास हुआ संशोधन

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद वंदे मातरम पर बोले शशि थरूर, कहा- बिना चर्चा के पास हुआ संशोधन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वंदे मातरम से जुड़े संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस संशोधन के बाद राष्ट्रीय गीत को कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान लागू हो गया है।

इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्होंने संशोधन को लेकर व्यावहारिक सवाल उठाए हैं।

थरूर ने क्या कहा?

थरूर के मुताबिक, यह संशोधन संसद में बिना पर्याप्त चर्चा के पास किया गया। उन्होंने कहा कि वह वंदे मातरम के शुरुआती दो पद और पूरा राष्ट्रगान गा सकते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत और अंत में पूरा राष्ट्रगीत गाना जरूरी किया जाता है, तो कार्यक्रमों में लोगों को काफी देर तक खड़े रहना पड़ सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि कानून बनाने वालों ने शायद ‘इंसानी फितरत’ को ध्यान में नहीं रखा।

वंदे मातरम को लेकर बढ़ी बहस

वंदे मातरम को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक बहस जारी है। सरकार की ओर से राष्ट्रीय गीत को अधिक कानूनी संरक्षण देने की पहल की गई है, जबकि विपक्ष के कुछ नेताओं ने इसके इस्तेमाल और पूरे गीत को अनिवार्य करने की व्यावहारिकता पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस नेता ने दिए ये तर्क? 

जन गण मन के दौरान दर्शकों को सम्मानपूर्वक खड़े होकर पूरे 52 सेकंड तक फोकस करना होता है. पूरा राष्ट्रीय गीत गाने में 3 मिनट 10 सेकंड लगते हैं. तमिलनाडु ने अभी फैसला किया है कि इन दोनों से पहले तमिल भाषा में राज्य गीत भी गाया जाएगा. इसमें 2 मिनट और लगेंगे. क्या हम सच में उम्मीद करते हैं कि दर्शक हर कार्यक्रम से पहले और बाद में 5 मिनट तक यानी कुल 12 अतिरिक्त मिनट तक सम्मानपूर्वक खड़े रहेंगे? क्या सम्मान और धैर्य कानून के जरिए लागू किया जा सकता है? मुझे डर है कि इस बिल का मकसद राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान बढ़ाना है, पूरा नहीं होगा, बल्कि इसका उल्टा भी हो सकता है. 

राष्ट्रपति ने बिल को दी मंजूरी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार इस अहम बिल को मंजूरी दे दी है. इसके तहत जान बूझकर राष्ट्रगीत वंदे मातरम के गायन में बाधा डालना और उसे रोकना क्राइम माना जाएगा. सरकार ने अपने बयान में कहा कि इसे वही कानूनी सुरक्षा मिलेगी, जो अभी राष्ट्रीय गान को हासिल है. लोकसभा ने 30 जुलाई को विधेयक को पारित किया था. राज्यसभा ने इसे एक दिन पहले ही मंजूरी दे दी थी.

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