मेडिकल टूरिज्म का सुपरपावर बनने के लिए भारत ने कमर कस ली है। देश को मेडिकल टूरिज्म के हब के तौर पर बढ़ावा देने के लिए सरकार एक योजना बनाने में जुटी है। इसके तहत अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तैयार करने, उन्हें बढ़ाने और मजबूत करने के लिए फंड दिया जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना को और बेहतर बनाने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन (DPIIT) काम कर रहा है। फ्यूचर रेडी यानी भविष्य के अस्पतालों के लिए उसकी इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग के स्टैंडर्ड लाने की योजना है। इनमें स्मार्ट हेल्थकेयर सर्जरी, AI-असिस्टेड डायग्नोस्टिक्स, डिजिटल पैथोलॉजी, टेलीमेडिसिन और इंटरऑपरेबल इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड्स जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।
इस प्रक्रिया में अस्पतालों के लिए जरूरी क्लिनिकल क्वालिटी स्टैंडर्ड्स और इंटरनेशनल एक्रेडिटेशन की जरूरतों को भी तय किया जाएगा। इसका मकसद होगा कि वे इस योजना के तहत फंड पाने के योग्य हो सकें।
पांच रीजनल मेडिकल हब बनेगा
यह कदम वित्त वर्ष 2026-27 की बजट घोषणा के बाद उठाया गया है। इसमें मेडिकल वैल्यू टूरिज्म के लिए रीजनल मेडिकल हब बनाने की बात कही गई थी।
सरकार ने प्राइवेट सेक्टर के साथ मिलकर पांच रीजनल मेडिकल हब बनाने में राज्यों की मदद करने का प्रस्ताव दिया है। ये हब इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर कॉम्प्लेक्स के तौर पर काम करेंगे। इनमें मेडिकल सर्विस, एजुकेशन और रिसर्च की सुविधाएं एक ही जगह पर मिलेंगी।
एक अधिकारी ने ईटी को बताया, ‘यह विचार अभी शुरुआती दौर में है। लेकिन, योजना ऐसे इंटीग्रेटेड मेडिकल डिस्ट्रिक्ट के लिए मॉडल फ्रेमवर्क बनाने की है जिनमें अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, रिसर्च सेंटर, बायोटेक पार्क और वेलनेस सुविधाएं शामिल हों।’
उन्होंने आगे कहा कि योजना की रूपरेखा तैयार करने में मदद के लिए एक कंसल्टिंग फर्म को शामिल किया जाएगा।
2030 तक 16.2 अरब डॉलर का होगा मार्केट
इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, 2025 में भारत का मेडिकल टूरिज्म मार्केट लगभग 8.7 अरब का होगा। 2030 तक इसके 16.2 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस योजना के तहत टीचिंग अस्पतालों के लिए स्टैंडर्ड प्लानिंग नियम और टेक्निकल बेंचमार्क भी प्रस्तावित हैं। इसके अलावा, जमीन के इस्तेमाल, बेड डेंसिटी, इंटेंसिव केयर कैपेसिटी, ट्रॉमा और इमरजेंसी केयर, डायग्नोस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, रिहैबिलिटेशन सुविधाएं, आउटपेशेंट इंफ्रास्ट्रक्चर और संबंधित हेल्थकेयर सेवाओं के लिए हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैंडर्ड्स को भी इस योजना में शामिल किए जाने की संभावना है।
यह बहुत जरूरी है। कारण है कि प्रस्तावित हब में आयुष सेंटर, मेडिकल वैल्यू टूरिज्म फैसिलिटेशन सेंटर और डायग्नोस्टिक्स, इलाज के बाद की देखभाल और रिहैबिलिटेशन के लिए एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर होगा। इंटरनेशनल और घरेलू पर्यटकों के लिए मरीजों के अनुभव को बेहतर बनाने के अलावा, इन हब से डॉक्टरों और संबंधित हेल्थ प्रोफेशनल्स सहित हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार के कई मौके पैदा होने की उम्मीद है। अधिकारी ने आगे कहा कि भारत को एक प्रमुख मेडिकल टूरिज्म डेस्टिनेशन के तौर पर स्थापित करने के लिए एक व्यापक मार्केटिंग फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा। इसमें खास तौर पर ज्यादा फायदे वाले इलाकों की पहचान की जाएगी। डिजिटल प्रमोशन रणनीतियों और इंटरनेशनल पार्टनरशिप मॉडल की सिफारिश की होगी।

