महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर राजनीतिक हलचल एक बार फिर बढ़ गई है। चर्चा है कि सरकार इन दोनों बिलों को संसद में फिर से ला सकती है। इसकी वजह यह है कि मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बावजूद अभी तक राष्ट्रपति की ओर से सत्रावसान की औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है।
इसी बीच बीजेपी ने रविवार को महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को संसद से पास कराने की अपील की। यह बयान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुणे में हुए एक कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण और पितृसत्तात्मक सोच को लेकर दिए गए बयान के बाद आया।
स्मृति ईरानी ने विपक्ष से की अपील
बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी, कांग्रेस और विपक्षी दलों से अपील की कि अगर वे महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं तो महिला आरक्षण से जुड़े बिल को संसद में पास कराने में सरकार का साथ दें।
उन्होंने कहा कि सरकार 2029 में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। बीजेपी का कहना है कि इस बिल को जल्द संसद से मंजूरी मिलनी चाहिए।
क्या संसद का सत्र फिर बढ़ सकता है?
लोकसभा का मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। हालांकि, अभी तक राष्ट्रपति की ओर से सत्रावसान की औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है।
इसी वजह से राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार सत्र को आगे बढ़ाकर महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े बिल संसद में पेश कर सकती है। कुछ विपक्षी दलों ने भी इस संभावना को लेकर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक यह आधिकारिक तौर पर नहीं कहा गया है कि इन बिलों को कब और किस तरह संसद में लाया जाएगा।
कांग्रेस ने सत्रावसान में देरी पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने संसद का सत्र खत्म करने की औपचारिक प्रक्रिया में हो रही देरी पर सवाल उठाया है।
उन्होंने कहा कि आमतौर पर लोकसभा के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने और सत्रावसान के बीच कुछ ही दिनों का अंतर होता है। उन्होंने कहा कि इस बार 10 दिन से ज्यादा समय बीतने के बावजूद राष्ट्रपति की मंजूरी की जानकारी नहीं मिली है।
जयराम रमेश ने पुराने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ वर्षों में स्थगन और सत्रावसान के बीच लंबा अंतर जरूर रहा है, लेकिन मौजूदा स्थिति को लेकर उन्होंने सरकार से सवाल पूछा है।
परिसीमन को लेकर भी बढ़ी राजनीतिक चर्चा
महिला आरक्षण के साथ परिसीमन को लेकर भी राजनीतिक चर्चा तेज है। परिसीमन का मतलब लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं और प्रतिनिधित्व का नए सिरे से निर्धारण करना है।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार किसी विशेष सत्र के जरिए परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन को आगे बढ़ाने की तैयारी कर सकती है। हालांकि, अभी तक सरकार ने इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
फिलहाल महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है।

