चर्चित भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए पुलिस वैज्ञानिक जांच का सहारा ले रही है। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद घटना स्थल से बरामद हथियार, खोखे और अन्य सबूतों को फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजने की तैयारी शुरू कर दी गई है। माना जा रहा है कि एफएसएल की जांच रिपोर्ट से पूरे मामले की सच्चाई सामने आने में मदद मिलेगी।
पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के मुताबिक, घटना के आठ दिन बाद बिहार राज्य विधि आयोग की जांच टीम 25 जून 2026 को शाहपुर प्रखंड के बिलौटी गांव पहुंची, जिसका नेतृत्व पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा कर रहे थे. इस दौरान शाहाबाद के डीआईजी सत्य प्रकाश, भोजपुर के जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया, पुलिस अधीक्षक राज समेत कई प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे. टीम ने मौके पर पहुंचकर सबसे पहले भरत तिवारी के परिजनों से बातचीत किया. इसके बाद अब जो नई जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक इस घटना में उपयोग किए गए पिस्टल की बैलेस्टिक जांच करवाई जाएगी. इसको लेकर एफएसएल को हथियार भेज दिए गए हैं.
क्या खुलेगा एनकाउंटर का सच ?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फॉरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि घटनास्थल से मिले खोखे आखिर किस हथियार से फायर किए गए थे. इसके साथ ही पुलिस और आरोपी पक्ष के हथियारों का बैलिस्टिक मिलान भी कराया जाएगा. इस प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि एनकाउंटर के दौरान कितनी गोलियां चलीं और किस हथियार से चलीं.
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी एनकाउंटर मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट बेहद अहम होती है. बैलिस्टिक जांच के जरिए यह भी पता चलता है कि गोली कितनी दूरी से चलाई गई, किस दिशा से आई और हथियार का इस्तेमाल वास्तव में हुआ या नहीं. ऐसे में इस केस में भी FSL रिपोर्ट को निर्णायक माना जा रहा है.
रिपोर्ट पर है जांच एजेंसियों की नजर
फिलहाल इस हाई प्रोफाइल केस में पुलिस की हर कार्रवाई पर नजर रखी जा रही है. जांच एजेंसियां यह भी परखेंगी कि घटनास्थल से मिले सभी साक्ष्य आपस में कितने मेल खाते हैं. रिपोर्ट आने के बाद यह साफ हो जाएगा कि पुलिस का दावा कितना सही है और घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था. इससे आगे की कानूनी प्रक्रिया भी तय होगी.

