भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय ट्रेड डील (Bilateral Trade Deal) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि इस समझौते का पहला चरण तभी लागू होगा, जब अमेरिका भारत को दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर टैरिफ (आयात शुल्क) का फायदा देगा।
पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच यही सहमति बनी थी कि भारत को अपने पड़ोसी देशों, आसियान (ASEAN) देशों और अन्य प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले बेहतर या बराबर व्यापारिक स्थिति मिलनी चाहिए। जब यह शर्त पूरी होगी, तभी समझौता लागू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अगर भारत को अमेरिकी बाजार में अनुकूल टैरिफ मिलेगा, तो देश का निर्यात तेजी से बढ़ सकता है। भारत अमेरिका के बड़े बाजार का पूरा लाभ उठाना चाहता है, लेकिन इसके लिए समान और प्रतिस्पर्धी व्यापारिक माहौल जरूरी है।
गोयल ने यह भी बताया कि भारत ने ऑफिस ऑफ द यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की जांच में हिस्सा लिया था। इसी जांच के तहत अमेरिका ने भारत के कुछ उत्पादों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया है।
केंद्रीय मंत्री ने भरोसा जताया कि जैसे ही भारत को प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर टैरिफ का लाभ मिलेगा, दोनों देशों के बीच ट्रेड डील का पहला चरण लागू हो जाएगा और भारत का निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी।
मंत्री का ये बयान ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिकी प्रशासन के एक विधायी प्रस्ताव पर सभी की नजरें टिकी हैं. इसके तहत रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाया जा सकता है. अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी कच्चे तेल और नेचुरल गैस के प्रमुख खरीददारों से होने वाले आयात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा.
हालांकि, प्रस्तावित कानून से अपने आप टैरिफ लागू नहीं हो जाएगा. धारा 113 के तहत ट्रंप के पास यह तय करने का विवेकाधीन अधिकार होगा कि टैरिफ लगाया जाए या नहीं. किन देशों पर यह लागू होगा. टैरिफ की दर क्या होगी. यह प्रस्ताव ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिका ईरान संघर्ष के कारण हॉर्मुज से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई है.

