कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के मंत्री बी. नागेंद्र को कैबिनेट से हटाने की मांग को लेकर बीजेपी और जेडीएस ने बड़ा प्रदर्शन किया। दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विधानसभा का घेराव करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने के कारण विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक, बीजेपी नेता सी.टी. रवि, प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र समेत कई बीजेपी और जेडीएस नेताओं को पुलिस ने एहतियातन हिरासत में ले लिया।
सी.टी. रवि ने लगाए गंभीर आरोप
हिरासत में लिए जाने से पहले सी.टी. रवि ने बी. नागेंद्र पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नागेंद्र पर महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के फंड में कथित गड़बड़ी के आरोप हैं और इस मामले में उन्हें पहले गिरफ्तार भी किया जा चुका है।
विधानसभा की कार्यवाही को लेकर भी विरोध
बीजेपी और जेडीएस मंत्री बी. नागेंद्र को कैबिनेट से हटाने की मांग कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि नागेंद्र का नाम करीब 89 करोड़ रुपये के वाल्मीकि निगम घोटाले से जुड़े मामले में सामने आया है।
आर. अशोक ने कहा कि जब तक नागेंद्र को मंत्री पद से नहीं हटाया जाता, तब तक विपक्ष इस मुद्दे को विधानसभा में उठाता रहेगा।
बीजेपी कार्यकर्ता पिछले एक सप्ताह से इस मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को बीजेपी ने बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क से मार्च निकाला और विधान सौधा का घेराव करने की कोशिश की।
क्या है वाल्मीकि निगम घोटाला?
यह मामला मई-जून 2024 में सामने आया था। उस समय निगम के अकाउंट सुपरिटेंडेंट पी. चंद्रशेखरन ने आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने एक सुसाइड नोट में निगम में वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया था।
जांच के दौरान सामने आया कि यूनियन बैंक में निगम के खाते से करीब 89 करोड़ रुपये कथित तौर पर अवैध तरीके से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए गए। बाद में जांच में करीब 187 करोड़ रुपये के फंड में गड़बड़ी की बात भी सामने आई।
पहले दिया था इस्तीफा, फिर कैबिनेट में लौटे
उस समय बी. नागेंद्र कर्नाटक सरकार में अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री थे। विवाद बढ़ने और केंद्रीय एजेंसियों की जांच के बीच उन्होंने 6 जून 2024 को सिद्धारमैया कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था।
इसके बाद 3 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के कैबिनेट विस्तार के दौरान बी. नागेंद्र को फिर से सरकार में शामिल किया गया और उन्हें योजना एवं सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी दी गई।
अब बीजेपी और जेडीएस उनके दोबारा मंत्री बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं और इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

