बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर गुरुवार (30 जुलाई) को हुए उपचुनाव में काफी कम मतदान दर्ज किया गया। चुनाव आयोग के अनुसार, शाम 6 बजे तक केवल 34.30% वोटिंग हुई। इस दौर के उपचुनावों में यह सबसे कम मतदान प्रतिशत रहा।
कम वोटिंग के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि इसका असर प्रशांत किशोर, बीजेपी और आरजेडी में से किसके लिए नुकसानदायक या फायदेमंद हो सकता है। हालांकि इसका जवाब मतगणना के बाद ही साफ होगा।
पिछले चुनावों में कितना हुआ था मतदान?
- 2025 विधानसभा चुनाव: 41.35% मतदान हुआ था और कुल 1,56,885 वोट पड़े थे। बीजेपी के नितिन नवीन ने 98,299 वोट हासिल कर आरजेडी की रेखा गुप्ता को 51,936 वोटों से हराया था।
- 2020 विधानसभा चुनाव: 35.91% मतदान हुआ था और 1,40,683 वोट पड़े थे।
- 2015 विधानसभा चुनाव: 40.24% मतदान दर्ज हुआ था। उस समय 1,44,152 वोट पड़े थे और नितिन नवीन ने 39,767 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी।
इन आंकड़ों से साफ है कि 2026 के उपचुनाव में 34.30% मतदान पिछले तीन चुनावों की तुलना में सबसे कम रहा है। अब सभी की नजर मतगणना पर है, जिससे पता चलेगा कि कम मतदान का फायदा किसे मिलता है।
कम वोटिंग के क्या हैं मायने?
बिहार के राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार धीरेंद्र कुमार ने इस पर अपनी राय रखी. उन्होंने बताया कि बांकीपुर में मतदान कम होना नई बात नहीं है. अगर 2025 को छोड़ दें तो यहां हर बार लगभग 35 से 40 प्रतिशत के बीच में ही मतदान हुए हैं. 40% से करीब डेढ़ प्रतिशत अधिक मतदान सिर्फ 2025 में हुए थे.
उन्होंने कहा कि ऐसा देखा जाता है कि जो उपचुनाव होते हैं उसमें वोटिंग प्रतिशत में कमी आती है. उप चुनाव में मतदाताओं का उत्साह कम होता है. रही बात चुनाव के रिजल्ट की तो यह बात सही है कि बीजेपी, प्रशांत किशोर और आरजेडी तीनों लड़ाई में मजबूती के साथ है.
धीरेंद्र कुमार कहते हैं, “जातीय कमीकरण के हिसाब से मुस्लिम वर्ग का ज्यादातर वोट प्रशांत किशोर के पक्ष में जाने की चर्चा हो रही है. ब्राह्मण वोट जो करीब सात प्रतिशत है इसमें भी कुछ वोट प्रशांत किशोर को गया है. कहा जा रहा है कि भूमिहार का 30 से 40% वोट पीके को मिला है. हालांकि प्रशांत किशोर को बहुत फायदा नहीं होगा.”
उन्होंने आगे कहा, “मेरा मानना है कि बीजेपी के जीतने की संभावना अधिक है… जीत का अंतर कम होगा. सेकंड और थर्ड कौन होगा यह कहना मुश्किल है. क्योंकि आरजेडी से तेजस्वी यादव ने भी अंतिम समय में दम लगाया. अगर आरजेडी के कुछ वोट को 10 या 20% काट भी देते हैं तो भी प्रशांत किशोर को बहुत बड़ा फायदा नहीं मिलने वाला है.”

