नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार, 26 अगस्त को अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। भोटेकोशी नदी में अचानक पानी बढ़ने से कई गांव, सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स बुरी तरह प्रभावित हुए। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, इस हादसे में कम से कम 4 लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग लापता हैं।
14 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स प्रभावित
बाढ़ से रसुवागढ़ी, चिलिमे समेत करीब 14 हाइड्रोपावर और सोलर प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंचा है। इन प्रोजेक्ट्स की कुल क्षमता करीब 748 मेगावाट बताई जा रही है। इनमें कुछ प्रोजेक्ट्स चालू थे, जबकि कुछ का निर्माण चल रहा था।
बाढ़ का पानी इतनी तेजी से आया कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कई जगहों पर लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए।
384 लोग लापता, 105 भारतीय शामिल
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाके में 384 यात्रियों के लापता होने की जानकारी मिली है। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। लापता विदेशी नागरिकों में 105 भारतीय और 37 एनआरआई भी शामिल हैं। कई भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल के रास्ते जा रहे थे।
हालांकि, अधिकारियों ने साफ किया है कि यह शुरुआती आंकड़ा है और सभी लोगों की स्थिति की पुष्टि की जा रही है।
नेपाल ने भारत से मांगी मदद
हादसे के बाद नेपाल में बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया है। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस और नेपाल पुलिस की टीमें प्रभावित इलाकों में पहुंच रही हैं। सेना ने लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हेलीकॉप्टर भी लगाए हैं।
नेपाल सरकार ने भारत से भी राहत और बचाव कार्यों में मदद मांगी है। प्रभावित लोगों के इलाज और राहत के लिए आपातकालीन कदम उठाए जा रहे हैं।
बाढ़ की वजह अभी पूरी तरह साफ नहीं
भोटेकोशी नदी में इतनी अचानक बाढ़ आने की वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। अधिकारियों ने ग्लेशियर या ऊपर के इलाके में अचानक पानी जमा होने जैसी संभावनाओं की जांच शुरू कर दी है।
कुछ रिपोर्टों में बर्फ और चट्टानों के अचानक खिसकने को भी संभावित कारण बताया गया है। फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है और प्रशासन प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटा है।

