नदी का चर पाटकर शाही कैफे! 1 हफ्ते में नहीं तोड़ा तो प्रशासन चलाएगा बुलडोजर..

नदी का चर पाटकर शाही कैफे! 1 हफ्ते में नहीं तोड़ा तो प्रशासन चलाएगा बुलडोजर..

दक्षिण चौबीस परगना: नदी आधारित सुंदरबन इलाके में मैंग्रोव जंगल नष्ट करके और नदी का चर कब्जाकर एक विशाल कैफेटेरिया या रेस्तरां बनाने का गंभीर आरोप कैनिंग पूर्व के प्रभावशाली तृणमूल नेता और पूर्व विधायक शौकत मोल्ला के बेटे इरफान मोल्ला पर लगा था।

उस अवैध निर्माण को 7 दिन में तोड़ने का आदेश प्रशासन ने दिया है। यानी 29 जून तक इसे गिराना होगा, ऐसी डेडलाइन प्रशासन की तरफ से दी गई है। यहां तक कि SDPO कैनिंग और अनुमंडल प्रशासन की तरफ से साफ कह दिया गया है कि अगले 7 दिन के अंदर (29 जून तक) यह गैरकानूनी कैफे खुद अपनी पहल से तोड़ना होगा। अगर तय समय में मालिक पक्ष ने यह निर्माण नहीं तोड़ा, तो प्रशासन बुलडोजर से इसे मिट्टी में मिला देगा। और तोड़ने का सारा खर्च शौकत-पुत्र इरफान से ही वसूला जाएगा।

गौरतलब है कि इस गैरकानूनी कैफे पर आरोप लगने के बाद कैनिंग अनुमंडल शासक के दफ्तर से पिछले 18 जून तक जमीन से जुड़े सभी वैध दस्तावेज जमा करने का आदेश दिया गया था। उसके मुताबिक सुनवाई में इरफान के वकील हाजिर हुए, लेकिन कैफे बनाने के पक्ष में कोई वैध कागजात या ट्रेड लाइसेंस नहीं दिखा पाए।

भूमि एवं भूमि राजस्व विभाग की जांच में एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। जीवनतला के मौखाली इलाके में मातला नदी की करीब 22 बीघा सरकारी चर और मैंग्रोव की जमीन पर कब्जा किया गया था। 25 साल से पड़ी नदी की उस प्राकृतिक भेड़ी और चर को पूरी तरह गैरकानूनी तरीके से मिट्टी डालकर पाट दिया गया और यह शाही कैफेटेरिया बना दिया गया।

तृणमूल के राज में प्रशासन की नाक के नीचे कैसे यह ‘नदी चोरी’ करके इतना बड़ा कारोबार खड़ा कर दिया गया, इसे लेकर स्थानीय लोगों में जबरदस्त गुस्सा था। आखिरकार प्रशासन के इस सख्त कदम से इलाके के लोग खुश हैं। हालांकि इस कैफे के अलावा कैनिंग के इस इलाके में उग आईं दूसरी दुकानों का भविष्य क्या होगा, यह अभी तय नहीं हुआ है। उन सबके कागजात जांचने का काम चल रहा है, ऐसी खबर है। लेकिन आज सुबह देखा गया कि शौकत-पुत्र समेत कई लोग कैफे में हैं और वे तरह-तरह का सामान समेटना शुरू कर चुके हैं। माना जा रहा है कि 29 तारीख से पहले ही बोरिया-बिस्तर समेटकर चले जाएंगे।


“न्यूज़ ANP के लिए पश्चिम बंगाल से अतीकुर रहमान की रिपोर्ट”

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