नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के पोस्ट ग्रेजुएशन इतिहास के सिलेबस में बड़ा बदलाव किया गया है। नए सिलेबस में दिल्ली सल्तनत से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पेपर हटा दिया गया है। यह पेपर पहले तीसरे सेमेस्टर में पढ़ाया जाता था।
इतिहास विभाग ने कुल 38 डिसिप्लिन स्पेसिफिक इलेक्टिव पेपर प्रस्तावित किए थे, लेकिन तीसरे सेमेस्टर के लिए जारी नए सिलेबस में इनमें से केवल 16 पेपर शामिल किए गए हैं।
दिल्ली सल्तनत में क्या पढ़ाया जाता था?
हटाए गए पेपर का नाम ‘दिल्ली सल्तनत: स्ट्रक्चर ऑफ अथॉरिटी इन मेडिवल नॉर्थ इंडिया (13वीं-14वीं सदी)’ था।
इस पेपर में 13वीं और 14वीं सदी के दौरान उत्तर भारत की राजनीतिक व्यवस्था के बारे में पढ़ाया जाता था। इसमें मध्यकालीन शासन व्यवस्था, शासकों की सत्ता, प्रशासनिक ढांचा और उस दौर के राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक बदलावों का अध्ययन शामिल था।
कई अन्य पेपर भी हटाए गए
नए तीसरे सेमेस्टर के सिलेबस में दिल्ली सल्तनत के अलावा कई अन्य विषयों को भी शामिल नहीं किया गया है। इनमें हिस्ट्री ऑफ नॉर्थ इंडिया (1400-1550), जेंडर एंड वीमेन इन अर्ली इंडिया, पॉलिटिकल प्रोसेसेज एंड स्ट्रक्चर ऑफ पॉलिटीज इन एंशिएंट इंडिया और रिलिजन एंड सोसाइटी इन एंशिएंट इंडिया लिटरेचर जैसे पेपर शामिल हैं।
यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड के मुताबिक, इनमें से कुछ पेपर सिलेबस को मंजूरी देने की प्रक्रिया में अलग-अलग स्तरों पर पास भी हो चुके थे। हालांकि, 7 अगस्त को जारी अंतिम अधिसूचना में इन्हें शामिल नहीं किया गया।
वहीं, कुछ अन्य प्रस्तावित पेपर अभी भी यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड में ‘अंडर डिस्कशन’ या ‘अनडिस्कस्ड’ के रूप में दर्ज हैं। नए सिलेबस में हुए इन बदलावों के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के PG पाठ्यक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
DU ने सिलेबस में बदलाव को लेकर क्या कहा
दिल्ली यूनिवर्सिटी के डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स के रत्नाबली ने कहा कि किसी भी पेपर को जानबूझकर रोककर नहीं रखा गया था. उनके अनुसार सभी प्रस्तावित पाठ्यक्रम एकेडमिक काउंसिल के सामने रखे गए थे. इसके बाद वाइस चांसलर को उन पाठ्यक्रमों की समीक्षा के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाने की अनुमति दी गई.
उन्होंने बताया कि स्टैंडिंग कमेटी से कुछ पेपर मंजूर होने के बाद विभाग की ओर से कुछ स्वीकृत सिलेबस में बदलाव किए गए थे. इनमें कुछ पेपर जोड़ना या हटाना, यूनिट में बदलाव और रीडिंग को हटाना या बदलना शामिल था. इसी वजह से कुछ सिलेबस की दोबारा समीक्षा की गई. एक्सपर्ट कमेटी ने संशोधित सिलेबस की जांच के बाद उन पाठ्यक्रमों को नोटिफिकेशन के लिए मंजूरी दी, जिन्हें समीक्षा के बाद उचित पाया गया. यूनिवर्सिटी के अनुसार कुछ और पेपर को भी समिति की समीक्षा पूरी होने के बाद नोटिफाई किया जा सकता है.
NEP 2020 के बाद सिलेबस में बदलाव
दिल्ली यूनिवर्सिटी में सिलेबस में बदलाव की प्रक्रिया एनईपी 2020 के तहत प्रोग्राम में किया जा रहे पुनर्गठन के बाद से जारी है. पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर हुआ यह बदलाव उससे पहले किए गए अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम के बदलाव के बाद आया है. डीयू यूजी प्रोग्राम में एनईपी 2020 के अनुरूप बदलाव 2022-23 से शुरू हुए थे. दिल्ली सल्तनत से जुड़े एक पेपर को अंडर ग्रेजुएट स्तर पर भी पढ़ाया जाता है, लेकिन दोनों पाठ्यक्रम को अलग बताया गया है.
कुछ रिपोर्ट के अनुसार पोस्ट ग्रेजुएट स्तर का पेपर कई दशकों से मध्यकालीन भारत का एक महत्वपूर्ण कोर पेपर था, जबकि यूजी में इससे संबंधित पाठ्यक्रम भारतीय इतिहास का व्यापक सर्वेक्षण करता है. इसी तरह हिस्ट्री ऑफ नॉर्थ इंडिया, सी. 1400-1550 पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर एक विशेष विषय और ऐतिहासिक अध्ययन के तौर पर पढ़ाया जाता था, जबकि अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रम का स्वरूप व्यापक है.

