अनेकता में एकता और आपसी सम्मान ही हमारे भारत की असली पहचान है! वहीं आज के दौर में जब समाज को बांटने की कोशिशें होती हैं, तब झारखंड के रांची से आई यह तस्वीर दिल को सुकून देती है और आपसी भाईचारे की एक नई मिसाल पेश करती है। झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष रहमान खान जी को एक मंदिर के निर्माण में उनके सराहनीय और अमूल्य योगदान के लिए मंदिर समिति द्वारा पूरे आदर के साथ सम्मानित किया गया।यह कदम इस्लाम की सच्ची और खूबसूरत सीख को दर्शाता है:
आखरी पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब का संदेश
आखरी पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब का स्पष्ट आदेश था कि आप जितना सम्मान अपने मजहब का करते हैं, उतना ही सम्मान आपको दूसरे के मजहब का भी करना चाहिए।
रहमान खान जी की अनुकरणीय सोच
रहमान खान जी ने इसी पावन आदेश को अपने जीवन में उतारा है। उनकी यही सोच दिखाती है कि एक सच्चा इंसान और सच्चा मुसलमान वही है जो दूसरों की आस्था का भी दिल से सम्मान करे।
गंगा-जमुनी तहजीब की जीत
जब हम एक-दूसरे के धर्म और विश्वास का आदर करते हैं, तो समाज में नफरत की कोई जगह नहीं बचती। इस ऐतिहासिक और प्रेरणादायक पहल के लिए मंदिर समिति और अपनी सोच से समाज को रोशन करने वाले रहमान खान जी दोनों को दिल से सलाम! यह सद्भावना की मशाल ऐसे ही जलती रहे।

