जाति जनगणना के प्रारूप पर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, ‘ओपन-एंडेड’ सवालों को बताया बड़ी खामी

जाति जनगणना के प्रारूप पर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, ‘ओपन-एंडेड’ सवालों को बताया बड़ी खामी

कांग्रेस ने बुधवार को जाति जनगणना के मौजूदा तरीके को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि जाति की जानकारी लेने के लिए ‘ड्रॉप-डाउन’ विकल्प देने के बजाय लोगों को अपना जवाब खुद लिखने की सुविधा देना एक बड़ी खामी है। कांग्रेस का कहना है कि इससे जातियों के नाम अलग-अलग तरीके से दर्ज हो सकते हैं और जनगणना के आंकड़ों में गड़बड़ी हो सकती है।

कांग्रेस के मुताबिक, ऐसा करने से जाति जनगणना की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार इस प्रक्रिया को कमजोर कर रही है।

क्या है ड्रॉप-डाउन और ओपन-एंडेड तरीका?

‘ड्रॉप-डाउन’ सूची में लोगों को पहले से दिए गए विकल्पों में से अपनी जाति चुननी होती है। इसमें उन्हें अपनी तरफ से कुछ लिखना नहीं पड़ता।

वहीं, ‘ओपन-एंडेड’ सवाल में व्यक्ति को अपनी जाति का नाम खुद लिखना होता है। कांग्रेस का कहना है कि इससे एक ही जाति के नाम अलग-अलग तरीके से दर्ज हो सकते हैं। इससे सही आंकड़े जुटाना मुश्किल हो सकता है।

जयराम रमेश ने सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि जातिगत जनगणना सिर्फ जातियों की गिनती नहीं है, बल्कि इसका संबंध सामाजिक न्याय से भी है। इसके लिए सही सवाल पूछना और सही आंकड़े जुटाना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने पिछले चार दिनों में देशभर में 17 प्रेस कॉन्फ्रेंस की हैं। इनमें जाति जनगणना को सही तरीके से कराने की मांग उठाई गई।

रमेश ने आरोप लगाया कि अगर लोग अपनी जाति के नाम अलग-अलग तरीके से लिखेंगे तो एक ही जाति के कई नाम, उपजातियां और अलग-अलग स्पेलिंग दर्ज हो सकती हैं। इससे जाति जनगणना के आंकड़े प्रभावित होने की आशंका है।

खरगे और राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

जयराम रमेश ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 20 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त पत्र लिखा था।

इस पत्र में जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर आपत्ति जताई गई थी। कांग्रेस ने मांग की थी कि मौजूदा प्रश्नावली को हटाकर प्रमाणित जातियों की सूची के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार की जाए।

रमेश ने कहा कि तेलंगाना और बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों की तरह पहले से तैयार और प्रमाणित जाति सूची का इस्तेमाल किया जा सकता है। उनके मुताबिक, इससे जातियों की सही गिनती करने में मदद मिलेगी।

कांग्रेस ने यह भी मांग की थी कि नई प्रश्नावली तैयार करने से पहले राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम लोगों से चर्चा की जाए। जयराम रमेश के अनुसार, 20 अगस्त को भेजे गए पत्र का अभी तक सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है।

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