जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा फेशियल रिकग्निशन और बायोमेट्रिक निगरानी के इस्तेमाल के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले को इससे जुड़ी दूसरी लंबित याचिकाओं के साथ सुना जाएगा। यह याचिका सीपीएम के राज्यसभा सांसद ए.ए. रहीम ने दाखिल की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शनकारियों की बिना अनुमति चेहरे और बायोमेट्रिक जानकारी जुटाई गई।
AI तकनीक से निगरानी का आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि जंतर-मंतर पर AI आधारित स्मार्ट चश्मों और विशेष निगरानी वाहनों का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की निगरानी के लिए दो निजी कंपनियों की सेवाएं भी लीं।
डेटा नष्ट करने की मांग
याचिका में कहा गया है कि पुलिस के पास सार्वजनिक प्रदर्शन में शामिल लोगों की इस तरह बायोमेट्रिक पहचान करने का स्पष्ट कानूनी अधिकार नहीं है।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि इस तरह की निगरानी को असंवैधानिक घोषित किया जाए और इकट्ठा किया गया बायोमेट्रिक डेटा नष्ट करने का आदेश दिया जाए।
नागरिकों को अपना डेटा देखने की सुविधा देने की मांग
याचिका में पुलिस और निजी कंपनियों द्वारा इस्तेमाल की गई तकनीक, डेटाबेस और समझौतों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है। साथ ही प्रभावित लोगों को अपना डेटा देखने और उसे स्थायी रूप से हटवाने के लिए शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था देने की मांग की गई है।

