कब रुकेगा बेरमो में कोयले का काला कारोबार..?और कब जागेंगे पहरेदार..!

कब रुकेगा बेरमो में कोयले का काला कारोबार..?और कब जागेंगे पहरेदार..!

बेरमो (Bermo ):- शिवपूज़न सिंह /वरिष्ठ पत्रकार...कोयला नगरी बेरमो की दौलत, धन और संपत्ति काला हीरा यानि कोयला है.इस नगरी की पहचान, बुलंदी और शोहरत इसी की नेमत से है.कुदरत ने बेपनाह कोयले का भंडार इस जमीन के नीचे सौपा है.
लेकिन, बदकिस्मती यह है कि इस राष्ट्र की दौलत और सम्पदा को बेतहाशाा किसी न किसी जरिये से लुटकर खोखला और खत्म किया जा रहा है .

दुर्भाग्य इस नगर का ये है कि कोयले की चोरी, तस्करी और लूट का काला खेल कभी रुका नहीं, जो आज ताक बादस्तूर जारी है. बेशक बड़ी -बड़ी बाते, बकैती और बतोलेबाजी होती रहीं. कुछ समय के लिए खबर आती है कि छापेमारी कर कोयला जब्त हुआ,लेकिन अहले सुबह देखेंगे की सड़कों पर कोयला बेखौफ़ और बेहिसाब ढोयाा जा रहा है, रात के सन्नाटे में अवैध कोयला छोटी -बड़ी गाड़ियों से लदकर ले जाया जा रहा है.

इस काले धंधे में कितने चेहरे, कितने मुखौटे और कितने साझीदार है, ये तो गुपचुप और अंदर की बात है. लेकिन सच तो यही है कि इतना बड़ा खेल यू ही तो नहीं चलता होगा ? क्या इनके होनहार और होशियार रखवालों, पेहरदारों और मुलाजिमों को पता नहीं होगा?. क्या उनकी नजरों में और कानो में दिखलाई और सुनाई नहीं पडती होंगी . इसका जवाब भी बड़ा सरल और सीधा है, कि सबको सबकुछ पता है, लेकिन, सब चुप हैं, इनकी ख़ामोशी ही सबकुछ बंयां कर देरी हैं कि कितना बड़ा घालमेल हैं?

अभी अभी अनीता हत्याकांड को लेकर काफ़ी हंगामा हुआ, कोयला चोरों पर उसे मारने का आरोप हैं. मुख्य आरोपी संतोष साव सलाखों के पीछे है. इसके बावजूद कुछ दिन पहले रात के अँधेरे में कोयले से लदा पिक अप वेन का काफिला चंद्रपुरा के झरनाडीह के पास दिखा. खबर सामने आई तो बेरमो पुलिस और सीआईएसफ हरकत में आई और दों गाड़ी को पकड़ा. हकीकत है कि जब बेरमो नीद के आगोश में रहती है तो रात में अवैध कोयले का खेल शुरू होता है. बताया जाता है नावाडीह और चंद्रपूरा के रास्ते बेरोकटोक यह खेल चलता है.

अभी हाल के दिनों में सीआईएसएफ की टीम ने रानीबाग, पांच नंबर धोडाा, अमलो खासमहल से टनो कोयला जब्त किया. छापेमारी तो चलते रहती है, पर कोयले की तस्करी, लूट और चोरी रूकती नहीं है. रेलवे साइडीग जारंगडीह, कथारा, अमलो हॉल्ट में भी कोयला चोरी और कोयला चोरों का आतंक जोरो पर है. जिसकी खबरें भी सुर्खिया अक्सर बनती है, लेकिन कोयले का गैरकानूनी धंधा रुकता नहीं बल्कि बदस्तूर जारी ही रहता है.

अभी अवैध उतखनन को लेकर एक़ बड़ी खबर प्रभात खबर दैनिक में कुछ महीने पहले छपी थी. जो अत्यंत ही गंभीर और बड़े सवाल खड़े करती है . अख़बार ने लिखा था कि पिछले कुछ महीने से सीसीएल के बीएंडके एरिया के अधीन डीआरएंडएआरडी परियोजना चलकरी और झुंझको के बंद खदानों में कोयला माफियाओ की दादागिरी से कोयला धड़लले से निकाला जा रहा है. वो भी पूरी इंतजामत और दल बल के साथ. जहां खनन के लिए जेसीबी , पोकलेन मशीन, डीजी सेट और बड़े -बड़े हॉर्स पावर के मोटर पानी सुखाने के लिए लगाए गए है. कोयला खनन के लिए ब्लास्टिंग भी की ज़ा रहीं थी , ये अपने अप में एक़ चिंता का विषय है कि आखिर विस्फोटक कहां से आया? जो कई प्रश्नों को जन्म देता है.

सोचिये कितनी बड़ी हिमाकत और हिम्मत की बानगी कोयला माफियाओ की और से दिखाई जा रहीं थी . मानो एक़ सामानानंतर साम्राज्य चल रहा हो…सीसीएल मॅनॅग्मेंट और उनके सुरक्षा अधिकारी को खबर रहते भी शायद बेखबर थे . सवाल है कि आखिर ऐसी लापरवाही क्यों? आखिर क्यों ओहदें ओढ़कर बैठे मुलाजिम लाचार बनकर बैठे है?. अवैध कोयला खनन की यह स्थिति दर्शाती है कि हालात कितने खतरनाक है.

जिसने भी यह खबर पढ़ी और जो मसले उठाये गए. इसके बाद आखिर सीसीएल प्रबंधन,जिला प्रशासन, पुलिस, खनन
विभाग,डीजीएमएस,पीईएसओं ने अभी तक इस गंभीर मसले पर क्या कार्रवाई की?. क्या इस मुद्दे की जाँच कराई गई?, अगर जाँच हुई तो इसकी रिपोर्ट क्या आई? अगर जाँच नहीं बैठी तो क्यों नहीं बैठी? क्या इस मसले को ही खा -पका लिया गया?

इधर हाल के दिनों में कोयले का गैरकानूनी धंधा कुछ ज्यादा ही जडे गहरी जमा रहा हैं . मानो कायदे कानून ताक पर रख दिया गया हो . इनके पहेरदारों से पहरा हो नहीं रहा है , मानो राष्ट्र की संपत्ति को लुटवाने की खुली छूट दें रखी है.
सोचिये सरकार ने इतने बड़े इंतजामत किये हुए है ताकि कोई गड़बड़ न हो, कोई चोरी न हो, कोई लूट न हो. लेकिन यह होता है और हो रहा है. सचेत और सजगता की कमी साफ -साफ दिखलाई पडती हैं…

सच्चाई तो ये भी है कि अगर इनको रखवाले चाह जाए तो भला कोई भी कोयला इधर -उधर खिसका सकेगा?, किसी की इतनी हिम्मत और मजाल होंगी कि बेखौफ और बिंदास कोयले की चोरी -तस्करी-लूट करें ? बिल्कुल ऐसा नहीं हो सकता है, यहां कोयले के अवैध धंधे रोकने से पहले, सबसे जरुरी ये है कि इस तंत्र, इंतजामत और वयवस्था को दुरुस्त करना होगा, अगर वो जाग गए, जिम्मेदार हो गए तब शायद इस काले खेल पर लगाम लगेगी…इन सबसे ज्यादा सरकार की निगाहेँ पैनी रखनी पड़ेगी क्योंकि आखिरकार राष्ट्र की संपत्ति लूटी जा रहीं और राजस्व का भारी नुकसान हो रहा हैं.

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