पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को दोनों देशों के बीच चल रहे सैन्य टकराव के बीच ईरान ने दावा किया कि उसने अमेरिकी नौसेना के एक मानवरहित अंडरवाटर ड्रोन को पकड़ लिया है।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना के मुताबिक, यह ड्रोन होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार के पास पकड़ा गया। हालांकि, अमेरिकी सरकार या सेना ने अभी तक ईरान के इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
ईरान ने अमेरिकी ड्रोन पकड़ने का किया दावा
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, IRGC नौसेना ने एक विशेष खुफिया और सैन्य अभियान के दौरान अमेरिकी ड्रोन को अपने कब्जे में लिया।
ईरान का दावा है कि यह एक आधुनिक मानवरहित अंडरवाटर वाहन है, जिसका इस्तेमाल समुद्र के अंदर निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए किया जा सकता है। ईरानी मीडिया ने इसे ‘युद्ध की ट्रॉफी’ के तौर पर पेश किया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, यह ड्रोन अमेरिकी रक्षा तकनीक कंपनी एंड्यूरिल का Dive-LD अंडरवाटर वाहन हो सकता है। कंपनी ने अप्रैल 2025 में अमेरिकी नौसेना की एक यूनिट को पहला Dive-LD सौंपा था।
अमेरिका ने ईरान पर लगाए नए प्रतिबंध
ईरान के ड्रोन पकड़ने के दावे के बीच अमेरिका ने भी तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के विमानन क्षेत्र से जुड़े 36 संस्थानों और लोगों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं।
इनमें ईरानी एयरलाइंस के अलावा कुछ विदेशी कंपनियां और कारोबारी नेटवर्क भी शामिल हैं। अमेरिका का आरोप है कि ये नेटवर्क ईरान को विमान, विमान के कलपुर्जे और जरूरी तकनीक हासिल करने में मदद करते हैं।
ईरान की एयरलाइंस पर अमेरिका की नजर
अमेरिकी ट्रेजरी के मुताबिक, नए प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान की बची हुई एयरलाइंस और उन बिचौलियों पर दबाव बनाना है, जो तेहरान को अमेरिकी मूल के विमान और संवेदनशील तकनीक हासिल करने में मदद करते हैं।
अमेरिका का कहना है कि इन नेटवर्क का इस्तेमाल हथियारों, सैन्य कर्मियों और प्रतिबंधित सामान की आवाजाही के लिए भी किया जा सकता है।
‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ का हिस्सा
अमेरिका की यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ का हिस्सा है। इस अभियान की शुरुआत अगस्त में की गई थी। इसका उद्देश्य ईरान की आर्थिक और वित्तीय गतिविधियों से जुड़ी बची हुई अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को कमजोर करना है।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि जो लोग या कंपनियां ईरान की एयरलाइंस को आर्थिक या कारोबारी मदद देंगी, उन्हें वैश्विक वित्तीय व्यवस्था से बाहर किए जाने का जोखिम उठाना होगा।
इस तरह एक तरफ ईरान ने अमेरिकी ड्रोन कब्जे में लेने का दावा किया है, तो दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान के विमानन क्षेत्र पर नए प्रतिबंध लगाकर दबाव और बढ़ा दिया है।

