जमशेदपुर: नई दिल्ली: टाटा स्टील को वित्त वर्ष 2019-20 के आयकर पुनर्मूल्यांकन (री-असेसमेंट) मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने कंपनी की रिट याचिका फिर से बहाल कर दी है और मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 तय की है। साथ ही, अदालत ने टाटा स्टील को वित्त अधिनियम, 2026 में किए गए पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने की अनुमति भी दी है।
टाटा स्टील ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि यह मामला टाटा स्टील बीएसएल (जो अब टाटा स्टील में विलय हो चुकी है) के 25,185.51 करोड़ रुपये के ऋण माफ किए जाने से जुड़ा है। आयकर विभाग का मानना है कि इस ऋण माफी की राशि को आकलन वर्ष 2019-20 की कर योग्य आय में शामिल किया जाना चाहिए। इसी आधार पर विभाग ने दोबारा आकलन की प्रक्रिया शुरू की और 31 मार्च 2025 को संशोधित आकलन आदेश जारी किया था। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को होगी।
कंपनी ने मार्च 2025 में बाम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया को चुनौती दी थी। अगस्त 2025 में हाईकोर्ट ने तकनीकी आधार पर नोटिस और उससे संबंधित सभी कार्यवाहियों को निरस्त कर दिया था।
कोर्ट ने माना था कि नोटिस कानून के अनुसार निर्धारित फेसलेस असेसिंग ऑफिसर के बजाय ज्यूरिस्डिक्शनल असेसिंग ऑफिसर द्वारा जारी किया गया था। हालांकि, बाद में वित्त अधिनियम, 2026 के जरिए आयकर कानून में पूर्व प्रभाव से संशोधन किया गया, जिसके तहत ज्यूरिस्डिक्शनल असेसिंग ऑफिसर को भी पुनर्मूल्यांकन नोटिस जारी करने का अधिकार दे दिया गया।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे से जुड़े पूर्व निर्णयों को निरस्त करते हुए मामलों को संबंधित हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई के लिए भेज दिया। टाटा स्टील ने कहा है कि उसका मामला केवल तकनीकी आधार पर ही नहीं, बल्कि गुण-दोष (मेरिट) के आधार पर भी मजबूत है। कंपनी का मानना है कि वित्त अधिनियम, 2026 का पूर्व प्रभाव से किया गया संशोधन उसके मूल कानूनी तर्कों को प्रभावित नहीं करता। अब आयकर विभाग हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल करेगा, जिसके बाद 19 अगस्त को मामले की विस्तृत सुनवाई होगी।

