नई दिल्ली: सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता के कुछ दिनों बाद दोनों देशों की सेनाओं ने अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति की समीक्षा की।
यह बैठक अरुणाचल प्रदेश के किबिथू इलाके में वाचा-दमाई बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर हुई। इसमें दोनों देशों के कोर कमांडर स्तर के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना रहा।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व दीमापुर स्थित तीसरी कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने किया।
अरुणाचल में भारत-चीन सेना की बैठक क्यों अहम?
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी क्षेत्र में LAC के पास चीनी सैनिकों की गतिविधियों को लेकर रिपोर्ट सामने आई हैं।
ऐसे में दोनों सेनाओं के बीच बातचीत को सीमा पर तनाव कम करने और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डोभाल के चीन दौरे के बाद हुई बैठक
इससे पहले 25 अगस्त को भारत और चीन के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता हुई थी। भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी ने बातचीत की थी।
बैठक में सीमा विवाद के समाधान की दिशा में बातचीत जारी रखने और सीमा पर शांति बनाए रखने पर जोर दिया गया था।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत ने स्पष्ट किया था कि दोनों देशों के संबंधों में लगातार सुधार के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना जरूरी है।
डोभाल और वांग यी के बीच क्या हुई थी बातचीत?
अजीत डोभाल और वांग यी भारत-चीन सीमा वार्ता के लिए नियुक्त विशेष प्रतिनिधि हैं। यह वार्ता तंत्र दोनों देशों के बीच करीब 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़े विवाद के व्यापक समाधान के लिए साल 2003 में बनाया गया था।
दोनों देशों के बीच सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में भारत और चीन ने आपसी संबंधों को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
गलवान हिंसा के बाद बिगड़े थे रिश्ते
साल 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के संबंधों में काफी तनाव पैदा हो गया था।
अब दोनों देश सीमा पर शांति बनाए रखने और द्विपक्षीय संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। अरुणाचल प्रदेश में हुई यह सैन्य बैठक भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही है।

