अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर दिखाई दे रहा है। सबसे ज्यादा चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए तेल और गैस की सप्लाई का एक बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सोशल ट्रुथ पर दावा किया है कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही अब लगभग सामान्य हो गई है। ट्रंप के मुताबिक, युद्ध से पहले इस रास्ते से रोज करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल, कंडेनसेट और दूसरे पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते थे। अब उनके दावे के अनुसार करीब 1.8 करोड़ बैरल तेल यहां से गुजर रहा है।
हालांकि, ट्रंप के इस दावे पर उपलब्ध शिपिंग आंकड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। रॉयटर्स ने शिप-ट्रैकिंग कंपनी केप्लर के आंकड़ों के हवाले से बताया कि 2 सितंबर 2026 को होर्मुज स्ट्रेट से केवल छह जहाज गुजरे। इनमें दो बड़े गैस कैरियर, दो लॉन्ग-रेंज टैंकर, एक सुप्रामैक्स टैंकर और एक पैनामैक्स टैंकर शामिल थे।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप पिछले कुछ समय से होर्मुज स्ट्रेट को लेकर लगातार बयान दे रहे हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर यह रास्ता अमेरिका के नियंत्रण में है तो इसका नाम ‘ट्रंप स्ट्रेट’ रखा जाना चाहिए।
हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या वह वास्तव में इसका नाम बदलना चाहते हैं, तो ट्रंप ने कहा कि यह सिर्फ एक सुझाव था।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ओमान की खाड़ी और अरब सागर को फारस की खाड़ी से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। दुनिया के तेल और गैस कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए यहां तनाव बढ़ने से पूरी दुनिया में तेल की कीमतों और ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
जहाजों की कम आवाजाही से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट में लगातार कम होती जहाजों की आवाजाही से समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। अमेरिका के हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद व्यापारी जहाज इस रास्ते से गुजरने में ज्यादा जोखिम महसूस कर रहे हैं।
ईरान ने हाल में कई जहाजों को अपनी ब्लैकलिस्ट में भी शामिल किया है। इससे तेल और गैस के कारोबार में जोखिम और बढ़ गया है।
IMF ने भी दी चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जिवा ने भी होर्मुज संकट को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस जलमार्ग के लंबे समय तक बंद रहने से दुनिया भर में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और कर्ज लेने की लागत भी बढ़ सकती है।
इसका सबसे ज्यादा असर विकासशील देशों पर पड़ सकता है, जहां पहले से ही कर्ज का बोझ ज्यादा है।
अमेरिका और ईरान के बीच हमले तेज
अमेरिका ने 1 सितंबर 2026 की रात ईरान पर हमला किया था। ईरान के मुताबिक, इस हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि वह इन दावों की जांच कर रहा है और अमेरिकी सेना जानबूझकर नागरिकों को निशाना नहीं बनाती।
ट्रंप ने यह भी कहा है कि अमेरिकी सेना जरूरत पड़ने पर ईरान पर फिर से हमला करने के लिए तैयार है। उनका दावा है कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास ईरान की ओर से लगाए गए या दोबारा तैयार किए गए कई सैन्य उपकरणों को नष्ट कर दिया है।
ईरान ने दी अमेरिका को चेतावनी
ईरानी सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने कहा है कि अमेरिका के हमलों के जवाब में ईरान अपनी रणनीति बदलने जा रहा है। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी कि ईरान की नई रणनीति उसे बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने भी अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सिरिक में हुए हमले को युद्ध अपराध बताया और दावा किया कि वहां शादी की रस्म के दौरान बमबारी की गई।
ईरान ने अमेरिका के हमलों के जवाब में जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करने का भी दावा किया है।
UN ने जताई चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और किसी भी कार्रवाई में अधिकतम सावधानी बरती जानी चाहिए।
कुल मिलाकर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अगर इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से तेल और गैस की सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो इसका असर पेट्रोलियम कीमतों से लेकर महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था तक देखने को मिल सकता है।

