भारत के प्रधानमंत्री मोदी अपना चीन का सफल दौरा पूरा कर दिल्ली लौट गए हैं। दिल्ली रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में यूक्रेन युद्ध को जल्द से जल्द समाप्त करने की अपील पीएम मोदी ने की और साथ ही भारत और रूस के रिश्तों को खास बताया। पीएम मोदी का चीन दौरा इसलिए खास रहा क्योंकि इस दौरे से भारत और चीन के रिश्तों में गरमाहट लौटी है और दोनों देश विवाद सुलझाने पर सहमत हुए। साथ ही एससीओ शिखर सम्मेलन के घोषणा पत्र में पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई, जो भारत की कूटनीतिक जीत है। अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद के बीच पीएम मोदी के चीन दौरे पर पूरी दुनिया की निगाहें थीं।
दरअसल चीन के तियानजिन में शंघाई शिखर सम्मेलन 2025 की बैठक में चीन, रूस और भारत ने जिस तरह से एकजुटता दिखाई उससे पूरी दुनिया में एक संदेश गया है। एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर चीन और भारत के बीच बैठक को लेकर भी खूब चर्चा हो रही है। इस चर्चा की वजह है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भारत पर अतिरिक्त 50 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद भारत की पड़ोसी देश ड्रैगन के साथ करीब आया है ,यानी हाथी और ड्रैगन एक साथ चलने को तैयार है…
खास बात रही है कि भारत एससीओ में पहलगाम आतंकी हमले को शामिल कराने में सफल रहा। इसके साथ ही भारत ने जिस तरह से चीन के साथ करीबी बढ़ाते हुए रूस के साथ अपने संबंधों को लेकर प्रतिबद्धता व्यक्त की है वह स्पष्ट रूप से अमेरिका की टैरिफ वाली दादागिरी को जवाब है। मजेदार बात ये है कि मोदी ,पुतिन और जिनपिंग जब एक दूसरे के करीब आ कर जब किसी मुद्दे पर चर्चा कर रहे थे तो पाक पीएम शाहबाज किनारे खड़े हो कर चुपचाप एक टक ये दृश्य देख रहें थे.. यही नहीं मीटिंग समाप्ति के बाद भी रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने अपने लिमोजिन गाड़ी में ही अपने मित्र पीएम मोदी के साथ ले कर होटल के लिए रवाना हुए..
कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मीटिंग
पीएम मोदी ने चीन के शहर तियानजिन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मीटिंग की। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों पक्षों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर सहमति जताई। यह मीटिंग कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहीं क्योंकि यह वैश्विक तनावों के बीच बहुपक्षीय सहयोग का एक प्रमुख एससीओ शिखर सम्मेलन में हुई
अतीत के कड़वे अनुभवों ( 2020 के गलवान संघर्ष और सीमा विवाद) के बावजूद भारत ने एसीओ सम्मेलन में जाने का फैसला किया। भारत की तरफ से यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि अगस्त 2025 में दोनों देशों के बीच LAC पर सकारात्मक बातचीत एक दुर्लभ कूटनीतिक सफलता मिली थी, जो द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक गति लाई।
सम्मेलन के अंतिम दिन भारत ने एससीओ शिखर सम्मेलन में बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की। बैठक खत्म होने के बाद शंघाई सहयोग संगठन ( SCO ) के राष्ट्राध्यक्षों ने घोषणापत्र जारी किया। खास बात रही कि इस घोषणा पत्र में भारत के जम्मू-कश्मीर में हुए पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई।
भारत के लिए यह बड़ी बात रही कि जिस मंच पर रूस और चीन जैसे दिग्गज देश के राष्ट्राध्यक्ष मौजूद थे, वहां पाकिस्तान के सामने ही पहलगाम हमले की निंदा हुई। इसके साथ ही आतंक के खिलाफ लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया गया।
NEWS ANP के लिए कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट..

