जेएसएससी राज्य के छात्रों के साथ खिलवाड़ करना बंद करे..

रांची(RANCHI): झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग संस्था की कार्यप्रणाली ने राज्य के प्रतियोगी छात्रों को निराश किया है। संस्था की कार्यशैली से अभ्यर्थियों के भविष्य पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। लापरवाह प्रबंधन व्यवस्था के कारण एक गहरी निराशा जन्म ले रही है। इससे छात्रों का समय, संसाधन, ऊर्जा, हौसला सब कुछ बर्बाद हो रहा है। उक्त बातें राज्य के युवा नेतृत्वकर्ता एवं जेबीकेएसएस के संस्थापक सदस्य संजय मेहता ने शुक्रवार को नामकुम स्थित जेएसएससी घेराव व आंदोलन में पूरे राज्य से आए हजारों छात्रों के बीच कहा।

उन्होंने विरोध प्रदर्शन करते हुए आयोग पर जमकर निशाना साधा। संजय ने कहा कि जेएसएससी सीजीएल की परीक्षा आज तक नहीं हो पायी। यह साफ तौर पर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है। कोई संस्था किसी भी अभ्यर्थी का इस तरह से वक्त नहीं जाया कर सकती है।

छात्रों के समय की बर्बादी हो रही है। उम्र बढ़ रही है। जिसे किसी कीमत पर वापस नहीं लाया जा सकता। जेएसएससी की निराशाजनक कार्यशैली से सिर्फ इन नौजवानों का भविष्य नहीं बर्बाद हो रहा बल्कि एक बेहतर मानव संसाधन की उच्च क्षमता का राज्य के अंदर विनाश हो रहा है। पूरे राज्य में छात्रों में आक्रोश है। इस आक्रोश और पीड़ा को सरकार को समझना होगा।

क्या है पूरा मामला

जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के लिए वर्ष 2015 में आवेदन भरा गया गया। परीक्षा की तिथि: 21.08.2016 थी। परीक्षा नहीं हुई। इसके बाद फरवरी 2017 में विज्ञापन पुनः निकाला गया। मार्च 2017 में परीक्षा होनी थी, फिर नहीं हो सकी।

2019 में नवंबर-दिसंबर को परीक्षा लेनी थी, नई सरकार आयी। फिर परीक्षा नहीं हुई। 2021 में अप्रैल व मई तक परीक्षा होनी थी। फिर नहीं हुई।

21.08.2022 को परीक्षा होनी थी, अपरिहार्य कारणों से स्थगित कर दी गयी। फिर मई-2023 में परीक्षा होनी थी, लेकिन नहीं हुई।

अगस्त 2023 में परीक्षा तिथि की घोषणा की गयी, लेकिन परीक्षा नहीं हुई। इसके बाद 16 – 17 दिसंबर 2023 को भी परीक्षा तिथि तय की गयी थी, लेकिन स्थगित कर दी गयी।

छात्रों के विरोध को देखते हुए आयोग ने 21 व 28 जनवरी 2024 को परीक्षा की नयी तिथि की घोषणा की है।

संजय मेहता ने कहा कि इन तथ्यों से साफ तौर पर जेएसएससी की अकर्मण्यता जाहिर होती है। क्या देश में ऐसी कोई अन्य संस्था है जो इस तरह से लापरवाह है? यह स्थिति केवल एक प्रतियोगिता परीक्षा की है। अन्य परीक्षाओं का भी हाल बुरा है। विभिन्न कारणों से आयोग द्वारा विज्ञापन हर बार रद्द किया जाता रहा है। आखिर एक परीक्षा के लिए 2015 से अबतक चार बार आवेदन लिया जाना और 7 बार परीक्षा स्थगित करना कहाँ तक जायज है?

इतना ही नहीं। ऐसा प्रतीत होता है जैसे आयोग के पास विजन का घोर अभाव है। विज्ञापन संख्या -10/2023 एंव 11/2023 झारखण्ड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा 2023 के संबंध में दिनांक 12/12/2023 को जेएसएससी द्वारा जो आधिकारिक सूचना दी गयी है उसमें एक अन्य पहलू का ध्यान नहीं रखा गया है।

इसमें दिनांक 21/1/2024 (रविवार) एंव दिनांक 28/01/2024 (रविवार) को राज्य के विभिन्न जिलों में अवस्थित परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षा आयोजित करने की सूचना दी गयी है।

जबकी उसी तिथि एवं समय पर जेपीएससी विज्ञापन संख्या-27/2017 एवं सी–टेट परीक्षा तय है। इसी तिथि पर जेएसएससी की सीजीएल परीक्षा तय करने पर वैसे छात्र जिन्होंने उक्त परीक्षा में भी आवेदन किया है वे परीक्षा शामिल होने से वंचित हो जाएंगे। ऐसे में वे किसी एक परीक्षा में ही शामिल हो पाएंगे।

छात्रों की क्या है माँगे

  1. जेएसएससी सीजीएल परीक्षा का आयोजन जनवरी माह में किया जाए साथ ही साथ इसकी पूरी प्रक्रिया लोकसभा चुनाव के घोषणा के पहले पूर्ण किया जाए।
  2. जेएसएससी सीजीएल सहित जेएसएससी द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा में उपयोग ओएमआर शीट और रिस्पॉन्स की की कार्बन कॉपी ऊपलब्ध कराई जाए।
  3. जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में निर्धारित मानको जैसे सीसीटीवी – कैमरा, जैमर आदि एवं जिला मुख्यालय से नजदीक केन्द्र का निर्धारण सुनिश्चित किया जाए।
  4. उत्पाद सिपाही परीक्षा की आयोजन जनवरी माह में सुनिश्चित किया जाए।
  5. पीजीटी – शिक्षक परीक्षा की आंसर की की त्रुटि का यथाशीघ्र निवारण किया जाए और साथ ही साथ इसकी पूरी प्रक्रिया जनवरी में पूर्ण की जाए।
  6. लैब असिस्टेंट परीक्षा में क्रमबद्ध रौल नम्बर में – एक ही परीक्षा केन्द्र से अभ्यर्थियों का चयन हो जाना, सहित विभिन्न गड़बड़ियों की यथाशीघ्र जांच की जाए।
  7. नगरपालिका परीक्षा में हुई धांधली एवं गडबड़ी के लिए एक एसआईटी का गठन किया जाए एवं उसकी जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।
  8. जेएसएससी और सरकार से अनुरोध है की जेएसएससी की विभिन्न परीक्षाओं का आयोजन एक प्रतिष्ठित एजेंसी (टीसीएस) जो परीक्षाओं का भ्रष्टाचार मुक्त आयोजन करवाती है से परीक्षा ली जाए।
  9. जेएसएससी द्वारा ली जाने वाली परीक्षाओं में स्थानीय भाषाओं के प्रश्न में एकरुपता लायी जाय ताकि विषयवार परीक्षा परिणामों में अंतर न हो।
  10. नगरपालिका परीक्षा में पूछे गए भाषा के प्रश्नों की तरह जिसमें की 15 से 20 प्रश्न आउट ऑफ सिलेबस पूछे गए उसमें रोक लगा कर विशेष ध्यान देते हुए भविष्य में इसका दोहराव न हो। इसपर गंभीरता से ध्यान दिया जाए।
  11. एलडीसी नियुक्ति का फॉर्म भरने की तिथि और परीक्षा को जल्द पूर्ण किया जाए। जेएसएससी के लंबित निम्नलिखित विज्ञापनो सहीत भर्ती प्रक्रिया लोकसभा चुनाव की घोषणा के पहले प्रकाशित किया जाए।
  12. झारखंड पुलिस स्टेनोग्राफर, राजस्व कर्मचारी, हाई स्कूल शिक्षक, जेयूवीएनएल जेई,10+2 इंटरमीडिएट परीक्षा, दारोगा बहाली, उत्पाद दारोगा, कक्षपाल, स्थानीय भाषा शिक्षक नियुक्ति टीजीटी/पीजीटी यथाशीघ्र आयोजित की जाए।
  13. सभी पेंडिंग विज्ञापन का प्रकाशन व परीक्षा जनवरी फरवरी माह के बीच किया जाए।

क्या कहते हैं संजय मेहता

पूरे मामले को लेकर संजय मेहता ने कहा है कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जेएसएससी अपने कार्यशैली में सुधार करे। प्रबंधन को ठीक करे। परीक्षा एवं परिणाम समय पर पारदर्शिता के साथ आयोजित करे।

कुछ माह में लोकसभा और विधानसभा का चुनाव है। उससे पूर्व सभी नियुक्ति प्रक्रिया को पूर्ण करे। अन्यथा राज्य में इससे भी बड़ा आंदोलन होगा जिसकी जिम्मेवारी आयोग की होगी। यदि सभी जल्द सभी प्रक्रिया को पूर्ण नहीं किया गया तो फिर से एक बार बड़े छात्र समूह और प्रतियोगी छात्रों का हक मारा जाएगा। जिससे बड़ा आक्रोश पनपेगा। आंदोलन के माध्यम से जीएसएससी को आगाह किया गया है। छात्र अपने मुद्दों का समाधान चाहते हैं। सरकार आक्रोशित न करे।

NEWS ANP के लिए रांची से V SIngh की रिपोर्ट..

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