अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर एक बार फिर तेज हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि 1 नवंबर से सभी चीनी सामानों पर 100% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा. इससे अमेरिकी बाजार में चीनी उत्पादों पर कुल टैक्स दर लगभग 130% तक पहुंच जाएगी, जो पिछले कई दशकों में सबसे ऊंची है. चीन ने इस कदम को अनुचित और दोहरे मापदंड वाला बताया है. चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, ‘हाई टैरिफ की धमकी देना चीन से संबंध सुधारने का सही तरीका नहीं है. हमारी स्थिति साफ है. हम व्यापार युद्ध नहीं चाहते, लेकिन उससे डरते भी नहीं हैं.’
क्या है ट्रंप का बड़ा कदम?
राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन पर ‘अत्यधिक आक्रामक और शत्रुतापूर्ण व्यापार नीति’ अपनाने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि चीन ने हाल ही में रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश की है. इसके जवाब में ट्रंप प्रशासन ने महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी पर एक्सपोर्ट कंट्रोल लागू कर दिया है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ‘यह राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता की रक्षा के लिए आवश्यक है.’
‘धमकी वाली भाषा छोड़े अमेरिका’
चीन ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने 100 परसेंट टैरिफ लागू किया तो वैश्विक व्यापार व्यवस्था चरमरा जाएगी. चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘यह कदम वैश्विक सप्लाई चेन को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा. हम वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन अमेरिका को धमकियों की भाषा छोड़नी होगी.’
भारत को हो सकता है फायदा
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापार युद्ध से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अपना निर्यात बढ़ाने में लाभ मिलने की उम्मीद है. विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी. भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने कहा कि अमेरिका की ओर से चीन पर अधिक शुल्क लगाने से मांग भारत की ओर स्थानांतरित हो जाएगी. भारत ने 2024-25 में अमेरिका को 86 अरब डॉलर के सामान निर्यात किए हैं. रल्हन ने कहा, ‘इस वृद्धि से हमें लाभ हो सकता है.’ अमेरिका ने एक नवंबर, 2025 से चीनी वस्तुओं पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की है जिससे चीनी आयात पर कुल शुल्क दर लगभग 130 प्रतिशत हो जाएगी. यह कदम बीजिंग के नौ अक्टूबर 2025 के फैसले के जवाब में लिया गया, जिसमें दुर्लभ खनिज के निर्यात पर कड़े नए नियम लगाए गए हैं. ये दुर्लभ खनिज अमेरिकी रक्षा, इलेक्ट्रिक वाहन और स्वच्छ ऊर्जा उद्योगों के लिए बहुत जरूरी हैं.
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

