थैलेसीमिया पीड़ित बच्ची मिशा की इलाज के दौरान मौत
धनबाद। शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMMCH) में थैलेसीमिया से पीड़ित मासूम बच्ची मिशा की मौत हो गई। बच्ची की गंभीर हालत को देखते हुए उसे अस्पताल में भर्ती कर पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) में शिफ्ट किया गया था। हालांकि, चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद कुछ देर बाद कार्डियक अरेस्ट के कारण उसकी मौत हो गई। इस दुखद घटना के बीच बच्ची की मां सविता देवी ने ऐसा फैसला लिया, जिसने कई लोगों को भावुक कर दिया। उन्होंने अपनी बेटी की आंखों का दान करने की सहमति दी, ताकि उसकी आंखों से किसी दूसरे व्यक्ति की जिंदगी में रोशनी आ सके।
मां सविता देवी ने बेटी के नेत्रदान का लिया फैसला
जानकारी के अनुसार, मिशा को 3 नवंबर को ही रक्त चढ़ाया गया था और वह घर लौट गई थी। 4 नवंबर को बच्ची की हालत बिगड़ने पर उसकी मां सविता देवी ने समाजसेवी अंकित राजगढ़िया को फोन कर स्थिति की जानकारी दी। इसके बाद अंकित ने बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराने की व्यवस्था की।
इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई। इसके बाद अंकित राजगढ़िया ने उसकी मां को नेत्रदान के लिए प्रेरित किया। बेटी को खोने के गहरे दुख के बावजूद सविता देवी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। उन्होंने भावुक होकर कहा कि अब तक लोग उनकी बच्ची को रक्त देकर उसकी जिंदगी बचाने की कोशिश करते थे, लेकिन अब उनकी बेटी नेत्रदान के माध्यम से दूसरों को जीवन में रोशनी देगी। उन्होंने कहा कि इस तरह उनकी बच्ची हमेशा अमर रहेगी।
अस्पताल की नेत्र विभाग की टीम ने कराया नेत्रदान
मिशा के नेत्रदान की प्रक्रिया में SNMMCH के नेत्र विभाग की टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस दौरान डॉ. धर्मेंद्र कुमार, अशोक, मनोज और संदीप ने अपनी भूमिका निभाई। बच्ची के नेत्रदान के बाद अस्पताल के पीडियाट्रिक्स विभाग में मौजूद वार्ड बॉय, नर्स और पैरामेडिकल के विद्यार्थियों ने उसे सलामी देकर सम्मानित किया।
अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों ने बच्ची की मां के इस फैसले की सराहना की। बेहद कम उम्र में दुनिया छोड़ने वाली मिशा का यह योगदान नेत्रदान के महत्व और दूसरों की जिंदगी में बदलाव लाने की भावना को सामने लाता है।
अंकित राजगढ़िया ने मां के साहस को किया सलाम
समाजसेवी अंकित राजगढ़िया ने कहा कि थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चे उनके जीवन का अहम हिस्सा हैं। मिशा के जाने का उन्हें गहरा दुख है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही बच्ची से उनकी बातचीत हुई थी, लेकिन अचानक उसकी मौत की खबर ने उन्हें झकझोर दिया।
अंकित ने बच्ची की मां सविता देवी के साहस की सराहना करते हुए कहा कि बेटी को खोने के बाद भी उन्होंने नेत्रदान का फैसला लेकर समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। उनके अनुसार, मिशा का यह योगदान लंबे समय तक लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करेगा।
उपायुक्त ने शव ले जाने के लिए उपलब्ध कराया एंबुलेंस
मिशा की ननिहाल डुमरी में है, जबकि उसके पिता का घर मांडू में बताया गया है। बच्ची के शव को पिता के घर ले जाने के लिए धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन ने एंबुलेंस की व्यवस्था कराई। अंकित राजगढ़िया ने इस सहयोग के लिए उपायुक्त के प्रति आभार जताया।
मिशा की मौत से परिवार और उसे जानने वाले लोगों में शोक है। लेकिन उसकी मां के नेत्रदान के फैसले ने इस दुखद घड़ी में मानवता और दूसरों के लिए कुछ करने का संदेश दिया है।
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