ईरान ने जारी किया परमाणु हमले से बचाव का वीडियो, नागरिकों को 24 घंटे घरों में रहने और AC बंद रखने की सलाह

ईरान ने जारी किया परमाणु हमले से बचाव का वीडियो, नागरिकों को 24 घंटे घरों में रहने और AC बंद रखने की सलाह

IRNA ने 29 अक्टूबर को जारी किया आठ मिनट का वीडियो

तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अपने नागरिकों को संभावित परमाणु विस्फोट से बचाव के तरीके बताने वाला एक विशेष जागरूकता वीडियो जारी किया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने 29 अक्टूबर को करीब आठ मिनट का यह वीडियो प्रकाशित किया था। इसमें परमाणु विस्फोट के दौरान पैदा होने वाले खतरों और ऐसी स्थिति में नागरिकों को अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों की जानकारी दी गई है।

यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव की आशंका और कूटनीतिक बातचीत दोनों चर्चा में हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह गाइडलाइन ईरान के पैसिव डिफेंस वीक के दौरान जारी की गई। इसे इस्फहान प्रांत की आपातकालीन सेवाओं और संबंधित संस्थाओं की ओर से तैयार किया गया है।

परमाणु विस्फोट से होने वाले चार बड़े खतरों का जिक्र

वीडियो में परमाणु विस्फोट से पैदा होने वाले चार प्रमुख खतरों को समझाया गया है। इनमें विस्फोट के समय निकलने वाली तेज रोशनी, शक्तिशाली दबाव वाली लहर, अत्यधिक गर्मी और रेडियोएक्टिव पदार्थों का फैलना शामिल है। ये सभी प्रभाव आसपास मौजूद लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।

इस्फहान रेड क्रिसेंट सोसाइटी के शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के उपनिदेशक इब्राहिम अदेलजादेह ने लोगों को मजबूत इमारतों में शरण लेने की सलाह दी है। उनके मुताबिक, किसी इमारत का बेसमेंट या खिड़कियों से दूर बीच का कमरा सुरक्षित ठिकाना हो सकता है। लोगों को खिड़कियों और बाहरी दीवारों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

घर के अंदर रहें, खिड़कियां और एयर कंडीशनर बंद रखें

ईरान की गाइडलाइन के मुताबिक, परमाणु विस्फोट की स्थिति में लोगों को जल्द से जल्द किसी मजबूत इमारत के अंदर पहुंचना चाहिए। बेसमेंट उपलब्ध हो तो वहां शरण लेना बेहतर हो सकता है। अन्यथा इमारत के बीच वाले कमरे में रहना चाहिए, जहां खिड़कियों और बाहरी दीवारों से दूरी हो।

सुरक्षा के लिए घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखने तथा ऐसे एयर कंडीशनर और वेंटिलेशन सिस्टम बंद करने की सलाह दी गई है, जो बाहर की हवा को अंदर खींचते हैं। विस्फोट के बाद हवा में रेडियोएक्टिव कण फैलने की आशंका रहती है, इसलिए बाहर की हवा को अंदर आने से रोकना जरूरी बताया गया है।

वीडियो में कम से कम 24 घंटे तक सुरक्षित ठिकाने के अंदर रहने की सलाह दी गई है। हालांकि, लोगों को स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना होगा। खाने-पीने के लिए पैकेट में बंद खाद्य सामग्री और बोतलबंद पानी इस्तेमाल करने को कहा गया है।

खुले में हों तो विस्फोट की चमक की तरफ न देखें

वीडियो में उन लोगों के लिए भी निर्देश दिए गए हैं, जो परमाणु विस्फोट के समय खुले स्थान पर मौजूद हों। ऐसी स्थिति में सबसे पहले विस्फोट से निकलने वाली तेज चमक की ओर सीधे देखने से बचने की सलाह दी गई है।

यदि तुरंत किसी इमारत में पहुंचना संभव न हो, तो जमीन के करीब लेटकर किसी मजबूत दीवार या ठोस वस्तु की आड़ लेनी चाहिए। इस दौरान सिर और चेहरे को ढककर रखना जरूरी बताया गया है। विस्फोट से पैदा होने वाली शुरुआती दबाव की लहर गुजरने के बाद नजदीकी मजबूत इमारत में शरण लेने की सलाह दी गई है।

यदि जिस स्थान पर शरण ली गई है, वहां आग लगने या इमारत गिरने का खतरा हो, तो सुरक्षित तरीके से दूसरी मजबूत जगह पर जाने की कोशिश करनी चाहिए।

रेडियोएक्टिव धूल से बचने के लिए कपड़े और शरीर साफ करें

ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि परमाणु विस्फोट के बाद रेडियोएक्टिव कण हवा के साथ दूर तक फैल सकते हैं। ऐसे में विस्फोट स्थल से दूर मौजूद लोग भी रेडियोएक्टिव धूल के संपर्क में आ सकते हैं।

गाइडलाइन के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बाहर रहने के दौरान रेडियोएक्टिव धूल के संपर्क में आ जाता है, तो उसे अपने बाहरी कपड़े सावधानी से उतारने चाहिए। कपड़ों को झाड़ना नहीं चाहिए, बल्कि एक बंद बैग में रख देना चाहिए, ताकि रेडियोएक्टिव कण दूसरी जगह न फैलें।

इसके बाद शरीर और बालों को गुनगुने पानी तथा सामान्य साबुन से अच्छी तरह साफ करने की सलाह दी गई है। बाल धोते समय कंडीशनर का इस्तेमाल नहीं करने को कहा गया है। यदि नहाने की सुविधा उपलब्ध न हो, तो गीले कपड़े या वाइप्स से शरीर के खुले हिस्सों को साफ किया जा सकता है।

आयोडीन की गोलियां बिना डॉक्टर की सलाह के न लें

वीडियो में रेडिएशन से जुड़े बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं पर भी सावधानी बरतने को कहा गया है। इस्फहान की प्री-हॉस्पिटल इमरजेंसी सर्विसेज के प्रवक्ता अब्बास आबेदी ने लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना आयोडीन की गोलियां लेने से मना किया है।

उन्होंने बताया कि स्टेबल आयोडीन कुछ विशेष परिस्थितियों में थायरॉयड ग्रंथि को रेडियोएक्टिव आयोडीन सोखने से बचा सकता है। लेकिन यह सभी प्रकार के रेडिएशन या परमाणु विस्फोट के प्रभावों से सुरक्षा नहीं देता।

वीडियो में प्रशियन ब्लू नाम की दवा का भी उल्लेख किया गया है। इसका इस्तेमाल कुछ खास मामलों में शरीर के भीतर पहुंचे रेडियोएक्टिव सीजियम-137 को बाहर निकालने के लिए किया जाता है। इस दवा का इस्तेमाल भी चिकित्सकीय सलाह और निगरानी में ही किया जाना चाहिए।

पेजेशकियान बोले- युद्ध से किसी का भला नहीं, बातचीत का रास्ता खुला

एक ओर ईरान अपने नागरिकों को संभावित परमाणु आपातस्थिति से निपटने की जानकारी दे रहा है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कूटनीतिक तरीके से विवाद सुलझाने की बात कही है।

तेहरान में क्षेत्रीय गवर्नरों और मेयरों के साथ बैठक में पेजेशकियान ने कहा कि उनकी सरकार बाहरी ताकतों के कारण पैदा हुई समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए निकालने की कोशिश करेगी। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने सरकार को कूटनीतिक समाधान तलाशने के लिए कुछ विशेष अधिकार दिए हैं।

पेजेशकियान ने कहा कि युद्ध से किसी का भला नहीं होता, लेकिन दुश्मन ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर नहीं कर पाएंगे। उन्होंने अमेरिका पर सीमापार व्यापार बाधित करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया।

कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत की कोशिश

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों का जिक्र किया है। उन्होंने IRNA को दिए इंटरव्यू में कहा कि कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत तेज हुई है। उनके अनुसार, विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच दौरे, फोन कॉल और संदेशों के माध्यम से संपर्क जारी है।

अराघची ने कहा कि ईरान कूटनीति और अपनी रक्षा, दोनों के लिए तैयार है। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान की शर्तें स्वीकार किए जाने पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका की ओर से सैन्य तनाव बढ़ाए जाने पर कड़ा जवाब दिया जाएगा।

हालांकि, 3 नवंबर की रॉयटर्स रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर मतभेद बने हुए हैं। कतर की मध्यस्थता से एक प्रस्ताव पर बातचीत की कोशिश जारी है, जबकि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और परमाणु वार्ता शुरू करने से पहले अपनी शर्तें रखी हैं।

फरवरी के हमलों के बाद से जारी है तनाव

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच मौजूदा संघर्ष 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ था। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस संघर्ष का असर होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले समुद्री व्यापार पर भी पड़ा।

8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा हुई थी। इसके बाद 17 जून को दोनों पक्षों ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते के लिए बातचीत होनी थी। हालांकि, यह प्रक्रिया सफल नहीं हो सकी और समझौता बाद में टूट गया। सितंबर 2026 तक दोनों देशों के बीच फिर से सीमित सैन्य टकराव और तनाव की स्थिति बनी हुई थी।

ऐसे हालात में ईरान का परमाणु विस्फोट से बचाव संबंधी वीडियो जारी करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे एक ओर नागरिक सुरक्षा को लेकर सरकार की तैयारी सामने आती है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के साथ जारी तनाव और कूटनीतिक प्रयासों की जटिल स्थिति भी स्पष्ट होती है।


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