जामताड़ा सदर अस्पताल की एंबुलेंस से एक्स-रे मशीन ले जाने पर विवाद, डीसी ने लिया संज्ञान

जामताड़ा सदर अस्पताल की एंबुलेंस से एक्स-रे मशीन ले जाने पर विवाद, डीसी ने लिया संज्ञान

जामताड़ा सदर अस्पताल की एंबुलेंस से एक्स-रे मशीन ले जाने पर विवाद

जामताड़ा: सदर अस्पताल की एक्स-रे मशीन को एंबुलेंस में लादकर कोर्ट रोड की ओर ले जाने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। मामले में एक्स-रे टेक्नीशियन किरण कुमार ने मशीन को मरम्मत के लिए ले जाने की बात कही है। वहीं, अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. प्रभात सिन्हा ने पत्रकारों से जानकारी मिलने के बाद मामले की पड़ताल करने की बात कही।

प्रकरण को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आलोक कुमार ने मामले पर संज्ञान लिया है। हालांकि, मशीन को ले जाने की अनुमति, मरम्मत से संबंधित दस्तावेज और पूरी घटना की परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

मरम्मत के लिए मशीन ले जाने की बात, अनुमति पर उठे सवाल

मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल की एक्स-रे मशीन को एंबुलेंस में रखकर कोर्ट रोड की ओर ले जाया गया। इस दौरान एक्स-रे टेक्नीशियन किरण कुमार भी मौजूद थे।

जब उनसे मशीन ले जाने के संबंध में सवाल किया गया, तो उन्होंने बताया कि मशीन मरम्मत के लिए ले जाई जा रही थी। इस स्पष्टीकरण के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या मशीन को बाहर ले जाने के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी और क्या मरम्मत से संबंधित प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की गई थी।

इन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट होने के लिए अस्पताल प्रबंधन की जांच और संबंधित दस्तावेजों की पुष्टि जरूरी है।

अस्पताल उपाधीक्षक ने जानकारी लेकर जांच की बात कही

मामले को लेकर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. प्रभात सिन्हा ने पत्रकारों से सूचना मिलने के बाद जानकारी लेने की बात कही। इससे मशीन को बाहर ले जाने की प्रक्रिया और अस्पताल प्रबंधन को इसकी पूर्व सूचना होने के संबंध में सवाल उठे हैं।

वहीं, सिविल सर्जन डॉ. एसके मिश्रा ने रांची में बैठक में शामिल होने का हवाला दिया। फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि मशीन को ले जाने के लिए किस स्तर पर अनुमति दी गई थी।

उपायुक्त आलोक कुमार ने लिया संज्ञान

जामताड़ा के उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आलोक कुमार ने मामले को गंभीरता से लिया है। प्रकरण की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मशीन को मरम्मत के लिए नियमानुसार ले जाया जा रहा था या सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल में किसी प्रकार की अनियमितता हुई।

जांच में मशीन की स्थिति, मरम्मत की आवश्यकता, उसे ले जाने का उद्देश्य और संबंधित अधिकारियों की भूमिका जैसे पहलुओं का स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा।

स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर सवाल

इस घटना ने सदर अस्पताल में सरकारी उपकरणों और वाहनों के उपयोग की निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य और नियमों के अनुसार होना जरूरी है, ताकि मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।

हालांकि, मशीन को निजी कार्य के लिए ले जाने का आरोप अभी जांच का विषय है। इसे स्थापित तथ्य मानने से पहले प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।

पहले भी विवादों में रहा है सदर अस्पताल

रिपोर्ट के अनुसार, जामताड़ा सदर अस्पताल में इससे पहले 16 जुलाई को बेहतर इलाज नहीं मिलने के आरोप के बाद परिजनों द्वारा तोड़फोड़ की घटना हुई थी। ताजा प्रकरण के बाद अस्पताल की व्यवस्था और निगरानी को लेकर फिर चर्चा शुरू हो गई है।

अब जिला प्रशासन की जांच और संबंधित अधिकारियों के स्पष्टीकरण से ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

रिपोर्ट: आर. पी. सिंह, जामताड़ा


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